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Showing posts with the label हॉस्पिटल डायरी
चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल : कुछ नोट्स ( 6 ) " इस बेटे से बड़ी बेटियाँ हैं न आपके?" काफी देर से श्लोक की मम्मी को सुन रहे डॉ ने कुछ सोचते हुए पूछा. जी, दो हैं हूँ, तभी. मैं समझ गया हैरान परेशान श्लोक की माँ की समझ में लेकिन कुछ नहीं आया. पिछले आधे घंटे से वह अनवरत बोले जारी हैं. " डॉ साहेब पिछले साल भर से बीमार है मेरा बेटा. अरे, साल भर क्या जब से पैदा हुआ है तब से लेकर घूम रही हूँ डाक्टरों के पास. बुखार चढ़ता है फिर अपने आप उतर जाता है. कभी कभी टट्टियाँ शुरू हो जाती हैं, कभी खांसी. इतना सा दूध पीता है ( खुले हाथ में चारों उँगलियों के नीचे मोड़कर अंगूठा लगाते हुए ) बस फ़ौरन उलट देता है." तो आपने क्या इलाज किया, पर्चे हैं आपके पास? " जी, ये हैं ना." श्लोक की मम्मी ने पर्चों का गट्ठर निकालते हुए दिखाया. " अरे! यह टीबी की दवा क्यों दे रही हैं आप? किसने दिया?" लगभग चिल्लाते हुए डॉ ने पूछा. " हमको डॉ ने नहीं बताया कि टीबी की दवा है इनमे. हमें तो जो डॉ ने बताया वही दे रहे हैं." मम्मी लगभग रोती हुई आवाज में बोलीं. " जब आपका...
चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल : कुछ नोट्स ( 5 ) रविवार का दिन ज़रा देर से शुरू होकर देर तक चलता है हमारे यहाँ. भीड़ भाड़ कुछ ज्यादा ही रहती है, और दिनों की अपेक्षा. इसका एक कारण डॉ साहब का शाम को न मिलना भी है. लोगों का अवकाश भी रहता है अपने दफ्तरों से. सो, आज रविवार है और दिव्यांश के पापा इसी भीड़ में रिसेप्शन पर भिड़े पड़े हैं. " हमको दिखाना नहीं है, बस बात करनी है डॉ से. लूट मचा रखी है. ये देखो सब टीके लगवाए हैं हमने फिर मेरे बच्चे को टाइफाइड कैसे हो गया? सारे डाक्टरों का ये लूटने का जरिया है. अरे भाई जब टीके काम ही नहीं करते हैं तो लगाते क्यों हो? पैसे कमाने के लिए? " हंगामा बढ़ता देख डॉ साहब ने पापा को चैंबर में बुला लिया है. आपको हमसे बात करनी थी? हाँ तो ठीक है, पहले आप बैठ जाइए डॉ ने स्टूल पर बैठे हुए बच्चे को पर्चा लिख कर विदा किया फिर दिव्यांश के पापा की तरफ मुखातिब हुए जी, बताइए? बताना क्या, आपने सारे वैक्सीन हमारे बच्चे को लगवाए. आपने जो जो कहे हमने सब लगवाए फिर भी हमारा बच्चा जब तब बीमार रहता है. देखिए फिर उसको टाइफाइड हो गया है. आपने पिछले साल ही इसका इंजेक्...
चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल : कुछ नोट्स ( 4 )         रोज की तरह ओपीडी चल रही है. कुछ बच्चे चिल्ला रहे हैं, कुछ खेल रहे हैं. ज्यादातर के पिता या साथ आये चाचा ताऊ मोबाइल पर व्यस्त हैं. माएं, बच्चों को चुप कराने में व्यस्त हैं. भरती हो रहे एक बच्चे की माँ प्रोसीजर रूम का दरवाजा पीट रही है. अन्दर से बच्चा चीख चीख कर रो रहा है. उसे आई वी लाईन लगाई जा रही है.       एक दादी इतनी ऊंची आवाज में फोन से बतिया रही हैं कि डॉ के चैम्बर तक आवाज जा रही है. " हाँ, दाग्दर साहेब भर्ती का बताईन है. ... नाहीं .... कहति तुरंत भर्ती काराव .... हाँ .. अबहिन. गुलूकोस चढ़ी. कहि रहे मेडिकल कालिज लई जाव. .... अच्छा ... हूँ ...हूँ ... अरे नाहीं ... हूँ ... हूँ .. तौ ठीक है. हियैं भरती केहे देईति है. ... ठीक है ... रक्खौ.        वैक्सीन लगवाने आए बच्चे अस्पताल में घुसते ही बुक्का फाड़ कर रो रहे हैं. दूर गाँव से आया एक बच्चा नाक बहाता और खांसता हुआ चिप्स खाने में व्यस्त है.       एक परिवार चुप बैठा है. उनका नवजात बच्चा एन आई सी यू में कल रात ...
चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल : कुछ नोट्स ( 3 )        " जब बित्ता भरे का रहै, तब तो जिया लीन्हे रहौ, अब तुम जल्दी ते ठीक करौ यहिका " महिला ने रोते हुए डॉ से कुछ इस तरह बित्ता दिखाते हुए कहा कि डॉ कि हँसी छूट पड़ी. नकली गुस्सा दिखाते हुए डॉ ने कहा, " तुम अगर इसी तरह रोती चिल्लाती रहोगी तो तुम्हे मेडिकल कॉलेज भेजना पडेगा. इस तरह तुम्हारे बच्चे का इलाज मैं नहीं कर पाऊंगा." " अच्छा ठीक है अब न रोईबे हम " आंसू पोछते हुए महिला बोली.        अभी दो दिन पहले तेज बुखार में बिक्कू झटके आने पर दुबारा भरती हुआ है हमारे यहाँ. वाकई ये बच्चा बहुत छोटा था जब पहली बार यहाँ भरती होने आया था, मात्र 900 ग्राम का. तब बिक्कू का नाम बेबी ऑफ़ रश्मि हुआ करता था. बिक्कू कि मम्मी तब भी बहुत परेशान रहती थी बिक्कू को लेकर. एक तो करेला दूजा नीम चढ़ा वाली कहावत चरितार्थ करते हुए बिक्कू एक तो समय से काफी पहले इस दुनिया में आ गए, साथ ही दिल में एक छोटा सा छेद भी बना रखा है, जिसकी उसे जरूरत नहीं है. आशा और निराशा में झूलते हुए मम्मी ने पूरे पंद्रह दिन हमारे यहाँ काटे थे. काटना ही ...
चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल : कुछ नोट्स ( 2 ) " साढ़े नौ का टाइम लिखा रखा है, दस बजने वाले हैं अभी तक डॉ नहीं बैठे हैं. क्या तमाशा बना रखा है," शगुन के पापा गुस्से में रिसेप्शनिष्ट लड़की को हडकाए जा रहे हैं. भैया, आने वाले हैं बस डॉ, तब तक आप बच्चे को पानी से स्पंज करा दीजिए. सिस्टर जी बच्चे का बुखार नाप कर स्पन्जिंग करवाइए, गुनगुने पानी से. शगुन की मम्मी शगुन के माथे पर पट्टियां तो रख सकती हैं परन्तु बुखार में बच्चे को नहलाना ... न बाबा न. निमोनिया जकड़ लेगी सीने को. इनका बच्चा तो है नहीं, जो मन में आया बोल दिया. मम्मी जी धीरे धीरे भुनभुना रही हैं. चादर से और लपेट दिया बच्चे को. " डॉ साब साढ़े दस बजे आएंगे " रिसेप्शनिष्ट ने फोन रखते हुए चिल्लाकर कहा. ताकि सभी सुन ले. अभी वो बाहर गए हुए हैं. चलो कहीं और दिखा लेते हैं, डॉ तो अभी यहाँ आए नहीं. पिता जी के प्रस्ताव को माता जी ने धीरे से ठुकरा दिया, " नहीं. शगुन की दवा इन्ही डॉ की सूट करती है." मैं तो बच्चों का हॉस्पिटल हूँ, मुझे यह बात पता है कि रिसेप्शनिष्ट झूठ बोल रही है. डॉ, मेरे कैम्पस में घर पर ही ...
चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल : कुछ नोट्स ( 1 )           जी, मैं बच्चों का अस्पताल हूँ और बच्चों की रोने की आवाजें मुझे सुकून देती हैं. नहीं नहीं, बच्चों के हंसने के मैं विरुद्ध नहीं हूँ. लेकिन शांत, चुपचाप लेटे हुए बच्चे जो रो नहीं पा रहे, मुझे बेचैन कर देते हैं.         बारी बारी से या कोरस में रुक रुक कर रोते हुए बच्चे मुझे पसंद हैं. लेकिन, बहुत हिचकियाँ लेकर रोता हुआ एक ही बच्चा मुझे भी घबराहट से भर देता है.         रोते हुए बच्चे का हाथ पकड़ मेरी दीवार पर हौले से थप्पड़ मारती हुई माँ से मैं बिलकुल नहीं घबराता. नन्हे हाथों की गर्माहट मैं पसंद करता हूँ.       देखो अभी अभी एक जोर की चीख आई है डॉक्टर के कमरे से.        बाप रे! डेढ़ बरस का यह बच्चा कितनी जोर से दहाड़ता है. माँ के चेहरे पर पीड़ा के भाव कुछ क्षण के लिए आए और गए.       डॉ साब पहले तो कभी नहीं रोया किसी वैक्सीन के बाद इतनी जोर से? डॉ ने कार्ड भरते हुए बिना सिर उठाए कहा, " हाँ, अब आपका बच्चा बड़ा और समझदा...