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सॉरी, हरक्युलिस ----------------- " बंद ट्रक में सोते समय छ: लोगों की दम घुटने से मौत " बीती रात दिल्ली में ...... दादा जी सुबह का अखबार जोर जोर से पढ़ रहे थे l लगभग चीखते हुए मयंक बोला, " दादा जी प्लीज चुप हो जाइए और पेपर अपने मन में पढ़िए l मेरा आज साईंस का टेस्ट है, मैं अपना पाठ याद कर रहा हूँ l प्लीज ... प्लीज दादाजी l " दादाजी कुछ कहते कहते रुक गए, और चश्मा ठीक कर फिर से पेपर बिना आवाज़ के पढने लगे l मयंक अपना पाठ याद करने लगा l ... एक बड़े जार में, हरे पौधे के साथ एक चूहे को बंद कर दिया गया l एक दूसरे जार में पौधे और चूहे के साथ जलती हुई मोमबत्ती भी रख दी गई l कुछ समय बाद जिस जार में जलती हुई मोमबत्ती थी उसके अन्दर रखे हुए चूहे की मृत्यु हो गई l जार के अन्दर की ऑक्सीजन को मोमबत्ती ने जलाकर कार्बनडाईऑक्साइडऔर कार्बन मोनो ऑक्साइड में बदल दिया l मतलब ऑक्सीजन की कमी से चूहे की मौत हो गई ..... अपनी किताब बैग में रखते हुए मयंक ने दादाजी के पास आकर खूब प्यार किया और चिल्लाने के लिए माफी भी मांगी l दादाजी ने मुस्कुराकर उसे स्कूल के लिए बाहर तक छोड़ा l " दादाजी श...
# किस्सा_किस्सा_लोककथाएं #1 शेषनाग पर लेटे हुए विष्णु भगवान लक्ष्मी जी से बतिया रहे थे। दीवाली का भोर था सो लक्ष्मी जी काफी थकी हुई लग रही थीं, परंतु अंदर से प्रसन्न भी। लक्ष्मी जी ने मुस्कुरा कर कहा, ' हे देव, कल देखा आपने, नीचे मृत्युलोक में कितना लोग मुझे चाहते हैं। विष्णु भगवान कुछ अनमने से दिखे। बोले, देखिये लक्ष्मी जी, दीवाली के दिन तो बात ठीक है, लोग आपकी पूजा करते हैं, आपका स्वागत करते हैं, बाकी के दिनों में भगवान, भगवान होता है। हो सकता है कि कुछ दरिद्र और  अशिक्षित लोग आप की आकांक्षा रखते हो आपका स्वागत करते हों और आप को बड़ा मानते हो, परंतु शिक्षित वर्ग और योग्य लोग भगवान को लक्ष्मी से ऊपर रखते हैं। लक्ष्मी जी ने मुस्कुरा कर कहा नाथ, ऐसा नहीं है। बाकी दिनों में भी मृत्यलोक के प्राणी मुझे ही ज्यादा पसंद करते हैं। और पढ़े-लिखे योग्य लोगों की तो आप बात ही मत करिए। बात विष्णु भगवान को खल गई। बोले, " प्रिये, आइए चलते हैं इस बात की परीक्षा ले ली जाए। हालांकि लक्ष्मी जी दीवाली में थक कर चूर हो चुकी थीं पर यह मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहतीं थीं। देवलोक से भूलोक...
धीरज रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे l ओपीडी के बाद वार्ड में आज का आख़िरी राउंड भी बस अभी ख़त्म हुआ था l डॉ धीरज घर जाने ही वाले थे कि चैंबर का दरवाजा खोलते हुए स्टाफ़ ने हिचकिचाते हुए कहा " सर, एक बच्चा है l तो भेजो ना उसे, डॉ का अंदाज़ थोड़ा तल्खी भरा था l डॉ धीरज की तल्खी इसलिए थी कि मरीज दिखाने से पहले पूछने की क्या जरूरत? सबको पता है कि डॉ साहब अगर हॉस्पिटल में हैं तो मरीज देखना ही है l " सर, उसके पास पैसे नहीं है और मरीज गंभीर है शायद भरती की जरूरत पड़े l " वाक्य का आख़िरी हिस्सा उसने जल्दी से जोड़ा कि कहीं फिर डांट न पड़ जाए l क्योंकि नियम यह भी था कि मरीज के पास अगर पैसे नहीं भी हैं तो भी उसे ओपीडी में दिखाने से इनकार नहीं कर सकते l चार महीने की बच्ची माँ की गोद में निढाल हो गई थी l आँखें गड्ढे में घुसी हुई गाल पिचके हुए l एक बारगी तो डॉ को ऐसा लगा जैसे उसमे प्राण नहीं है l बहुत बार ऐसे ही लोग मरे हुए बच्चे को लपेट कर अस्पताल पहुँचते हैं l बच्चे में हरकत देखकर डॉ धीरज बच्चा माँ के हाथ से लगभग छीनते हुए इमरजेंसी की तरफ लपके l बड़ी मुश्किल से आईवी लाइन लग पाई l ऑक्सीजन औ...
लघुकथा - " वह आयेंगे " -------------------------- बिकास ... ओ ... बिका sssss स !!!! अस्सी घाट पर एक जर्जर मकान में झिंगोला खाट पर लेटी हुई बुढ़िया ने कराहते हुए आवाज लगाई l विकास ने उसकी आवाज सुनकर भी अनसुनी कर दी l " ई मरे फोन में दिन भर पता नहीं क्या बीनता रहता है ये लड़का? " बुढ़िया इतने धीरे से भुनभुनाई कि विकास तक आवाज नहीं पहुंची l " ए बेटा ज़रा अपने काका को चिट्ठी लिख दे, देख जायँ l पता नहीं फिर मौक़ा मिले न मिले l " बुढ़िया छलक आए आँसुओं को मैली धोती के कोने से साफ़ करती हुई भर्राए गले से बोली l " नहीं आयेंगे वह अब दादी l जब तुम्हारे सगे तुम्हे देखने नहीं आते तो वह क्यों आयें? विकास स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए बुदबुदाया " चार साल पहले भावावेश में मुझे गोद में उठा लिया था एक परदेसी व्यापारी ने और इन्हें माँ कह दिया, तबसे उन्हें सगे बेटे से ज्यादा समझती हैं " क्या कहे बिकास? कुछ नहीं दादी, लिख दे रहे हैं फिर से l विकास ने ट्विटर पर एक सौ चालीसवीं बार कॉपी पेस्ट कर टैग किया - " काका हो सके तो आ जाइए आपको गंगा दादी याद कर ...
नीलकंठ बाबा ------------ आज दशहरे के दिन राम सिंह ठेकेदार अपनी बोलेरो छोड़ पैशन प्लस पर सवार होकर मुहं अँधेरे ही घर से निकल पड़ा. उसे याद है पिछले दशहरे में पूरा दिन खोजने के बाद भी उसे नीलकंठ के दर्शन नहीं हुए थे. आज उसे महुए और आम के दो पुराने पेड़ कटवाने बगल के गाँव जाना था. ट्रेक्टर ट्राली और आरा, कुल्हाड़ों से लैस उसके आदमी भी पीछे - पीछे थे. काफी दूर का चक्कर लगा कर लौटे राम सिंह को वहीं पास के खेत में ठूंठ पर बैठे नीलकंठ दिखाई पड़े. आहिस्ता से मोटरसाइकिल बंद कर राम सिंह ने नीलकंठ बाबा को हाथ जोड़, सर झुका कर राम - राम का जाप किया. तभी महुआ काट रहा अंगदवा चिल्लाया, " भईया, यहिमा तो अंडा हैं, चिरई केर, थोरे दिन रुकि न जावा जाय? " अरे नाहीं, मामा लोग फिर पइसा मंगिहैं थाने पर, अंडा लई आव, होई सकति यही नीलकंठै केर होयं. आजु दसहरा आय, सुभ होई इनका खाबु " पुरखों की सुनाई कहानी पर विश्वास किये बैठा नीलकंठ कि राम ने रावण वध से ठीक पहले नीलकंठ को देखा था, भ्रमित हो रहा था. दुःख और अविश्वास से वह राम सिंह को देखकर मन ही मन बुदबुदाया, " रावण, तूने भी नाम बदल लिया....
लघुकथा - " वह आयेंगे " बिकास ... ओ ... बिका sssss स !!!! अस्सी घाट पर एक जर्जर मकान में झिंगोला खाट पर लेटी हुई बुढ़िया ने कराहते हुए आवाज लगाई l विकास ने उसकी आवाज सुनकर भी अनसुनी कर दी l " ई मरे फोन में दिन भर पता नहीं क्या बीनता रहता है ये लड़का? " बुढ़िया इतने धीरे से भुनभुनाई कि विकास तक आवाज नहीं पहुंची l " ए बेटा ज़रा अपने काका को चिट्ठी लिख दे, देख जायँ l पता नहीं फिर मौक़ा मिले न मिले l " बुढ़िया छलक आए आँसुओं को मैली धोती के कोने से साफ़ करती हुई भर्राए गले से बोली l " नहीं आयेंगे वह अब दादी l जब तुम्हारे सगे तुम्हे देखने नहीं आते तो वह क्यों आयें? विकास स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए बुदबुदाया " चार साल पहले भावावेश में मुझे गोद में उठा लिया था एक परदेसी व्यापारी ने और इन्हें माँ कह दिया, तबसे उन्हें सगे बेटे से ज्यादा समझती हैं " क्या कहे बिकास? कुछ नहीं दादी, लिख दे रहे हैं फिर से l विकास ने ट्विटर पर एक सौ चालीसवीं बार कॉपी पेस्ट कर टैग किया - " काका हो सके तो आ जाइए आपको गंगा दादी याद कर रही हैं " अप्रत्य...
धीरज           रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे l ओपीडी समाप्त कर वार्ड में आज का आख़िरी राउंड भी बस अभी ख़त्म हुआ था l डॉ धीरज घर जाने ही वाले थे कि चैंबर का दरवाजा खोलते हुए स्टाफ़ ने हिचकिचाते हुए कहा " सर, एक बच्चा है l तो भेजो ना उसे, डॉ का अंदाज़ थोड़ा तल्खी भरा था l डॉ धीरज की तल्खी इसलिए थी कि मरीज दिखाने से पहले पूछने की क्या जरूरत? सबको पता है कि डॉ साहब अगर हॉस्पिटल में हैं तो मरीज देखना ही है l " सर, उसके पास पैसे नहीं है और मरीज गंभीर है शायद भरती की जरूरत पड़े l " वाक्य का आख़िरी हिस्सा उसने जल्दी से जोड़ा कि कहीं फिर डांट न पड़ जाए l क्योंकि नियम यह भी था कि मरीज के पास अगर पैसे नहीं भी हैं तो भी उसे ओपीडी में दिखाने से इनकार नहीं कर सकते l         चार महीने की बच्ची माँ की गोद में निढाल हो गई थी l आँखें गड्ढे में घुसी हुई गाल पिचके हुए l एक बारगी तो डॉ को ऐसा लगा जैसे उसमे प्राण नहीं है l बहुत बार ऐसे ही लोग मरे हुए बच्चे को लपेट कर अस्पताल पहुँचते हैं l बच्चे में हरकत देखकर डॉ धीरज बच्चा माँ के हाथ से लगभग छीनते हुए इमरजेंसी की तर...
सॉरी, हरक्युलिस " बंद ट्रक में सोते समय छ: लोगों की दम घुटने से मौत " बीती रात दिल्ली में ...... दादा जी सुबह का अखबार जोर जोर से पढ़ रहे थे l लगभग चीखते हुए मयंक बोला, " दादा जी प्लीज चुप हो जाइए और पेपर अपने मन में पढ़िए l मेरा आज साईंस का टेस्ट है, मैं अपना पाठ याद कर रहा हूँ l प्लीज ... प्लीज दादाजी l " दादाजी कुछ कहते कहते रुक गए, और चश्मा ठीक कर फिर से पेपर बिना आवाज़ के पढने लगे l मयंक अपना पाठ याद करने लगा l ... एक बड़े जार में, हरे पौधे के साथ एक चूहे को बंद कर दिया गया l एक दूसरे जार में पौधे और चूहे के साथ जलती हुई मोमबत्ती भी रख दी गई l कुछ समय बाद जिस जार में जलती हुई मोमबत्ती थी उसके अन्दर रखे हुए चूहे की मृत्यु हो गई l जार के अन्दर की ऑक्सीजन को मोमबत्ती ने जलाकर कार्बनडाईऑक्साइडऔर कार्बन मोनो ऑक्साइड में बदल दिया l मतलब ऑक्सीजन की कमी से चूहे की मौत हो गई ..... अपनी किताब बैग में रखते हुए मयंक ने दादाजी के पास आकर खूब प्यार किया और चिल्लाने के लिए माफी भी मांगी l दादाजी ने मुस्कुराकर उसे स्कूल के लिए बाहर तक छोड़ा l " दादाजी शाम को म...