Skip to main content

चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल : कुछ नोट्स ( 4 )



       रोज की तरह ओपीडी चल रही है. कुछ बच्चे चिल्ला रहे हैं, कुछ खेल रहे हैं. ज्यादातर के पिता या साथ आये चाचा ताऊ मोबाइल पर व्यस्त हैं. माएं, बच्चों को चुप कराने में व्यस्त हैं. भरती हो रहे एक बच्चे की माँ प्रोसीजर रूम का दरवाजा पीट रही है. अन्दर से बच्चा चीख चीख कर रो रहा है. उसे आई वी लाईन लगाई जा रही है.
      एक दादी इतनी ऊंची आवाज में फोन से बतिया रही हैं कि डॉ के चैम्बर तक आवाज जा रही है. " हाँ, दाग्दर साहेब भर्ती का बताईन है. ... नाहीं .... कहति तुरंत भर्ती काराव .... हाँ .. अबहिन. गुलूकोस चढ़ी. कहि रहे मेडिकल कालिज लई जाव. .... अच्छा ... हूँ ...हूँ ... अरे नाहीं ... हूँ ... हूँ .. तौ ठीक है. हियैं भरती केहे देईति है. ... ठीक है ... रक्खौ.
       वैक्सीन लगवाने आए बच्चे अस्पताल में घुसते ही बुक्का फाड़ कर रो रहे हैं. दूर गाँव से आया एक बच्चा नाक बहाता और खांसता हुआ चिप्स खाने में व्यस्त है.
      एक परिवार चुप बैठा है. उनका नवजात बच्चा एन आई सी यू में कल रात भर्ती हुआ है. बुआ जी फोन पर किसी से धीरे धीरे बात कर रही हैं. पता नहीं.... डॉ अभी कुछ बता नहीं रहे हैं .... हाँ .. हाँ .. नहीं .... कह रहे शुरू के बहत्तर घंटे कुछ नहीं कह सकते. ... वही तो..... उनको कुछ बीमारी ही पता नहीं चल रही. कभी कहते हैं इन्फेक्शन हो गया है ... कभी कहते गंदा पानी पी लिया है. नहीं ...टट्टी भी किया और पेशाब भी. हाथ पैर भी हिला रहा है. ... पता नहीं ... अभी नहीं ...कह रहे वेंटिलेटर पर रखना पड़ सकता है. ... कुछ नहीं .... अभी तो बस पैसे पर पैसे जमा कराते जा रहे हैं. ये जांच .. वो जांच.
      परिवार का कोई न कोई आदमी हर दस मिनट में अन्दर झाँक रहा है. एन आई सी यू की नर्स दो बार चिल्ला चुकी है, ' आप लोग बार बार मत आईए, डॉ साहब ने मना किया है. अरे! छुईए नहीं बच्चे को. दूर से देखिए, एक बार में एक आदमी."
बुआ जी दूर से आई हुई मौसी को आँखों के इशारे से बुलाती हुई फुसफुसाती हैं, " अरे! इनको बकने दो, तुम आओ. हमारा बच्चा है, हम देखेंगे नहीं?"
     आइए, डॉ के चैंबर में चलते है, देखते हैं वहाँ क्या हो रहा है -
कितनी उम्र है बच्चे की?
29 दिन का हो गया आज.
हूँ. आराम से गोद में लेकर बैठ जाईए. बस ऐसे .. हाँ. अब बताइए.
" सर मेरे बच्चे को सर्दी लग गई है." मम्मी ने स्टूल पर बैठते हुए कहा. हूँ, सर्दी मतलब? डॉ ने कागज़ पर कुछ लिखते हुए पूछा.
हरी हरी पोट्टी कर रहा है.
और?
आज जब एक बार छींका था इसने तो नाक से एक दो बूँद पानी निकला था
और?
सीने में खड़ - खड़ बोल रहा है
और कोई परेशानी?
" इसको गैस बहुत बन रही है, पेट में दर्द हो रहा है. बहुत रोता है. रात में सोता नहीं है. पेशाब करने से पहले चीखता है." सामने बैठी हुई लड़की ने बुरा सा मुह बनाते हुए एक सांस में जल्दी से बोला. ऐसा लगा कि इन सब समस्याओं की जड़ सामने बैठा हुआ डॉ ही है. " आप बच्चे की बुआ हैं ना? " डॉ ने उसे घूरते हुए कहा. लड़की अकबका कर चुप हो गई.
      डॉ ने आले से धड़कन और सीना ध्यान से सुना, सर पर हाथ फेरा, नैपकिन हटा कर देखा.
देखिए, आपके प्रश्न पूरे हो गए हों तो मेरी बात सुनिए, बस दो मिनट लगेंगे. डॉ कागज़ पर पेन रख कर माँ से मुखातिब हुआ.
आपका बच्चा ठीक से दूध पीता है?
नहीं, ठीक से नहीं पीता है, जो पीता है सब निकाल देता है.
हूँ, अच्छा, पेशाब कितनी बार किया है पिछले चौबीस घंटे में?
बहुत बार, पेशाब तो डॉ साब हर दो दो मिनट में करता है
आपके बच्चे का वजन है आज का 3.9 किलोग्राम, जब पैदा हुआ तब वजन कितना था?
दो किलो सात सौ ग्राम
हूँ.
     अब दो मिनट मेरी बात सुनिए, डॉ उपदेश देने के मूड में आ गया है.
देखिए, अगर आपका बच्चा अच्छे से दूध पिए, कैसे पता चलेगा कि अच्छे से दूध पी रहा है?
अच्छे से पेशाब करे, अच्छे से मतलब चौबीस घंटे में सात - आठ बार से ज्यादा. और ठीक से उसका वजन बढ़े, एक हफ्ते में लगभग डेढ़ सौ ग्राम के आस पास. तो कितनी बार आपका बच्चा दूध निकाल रहा है? कितनी बार टट्टी कर रहा है? इससे कोई मतलब नहीं.
कुछ और बातें समझ लीजिए जो आपके बहुत काम आएंगी.
केवल माँ का दूध पिलाएं शुरू के छः महीनों तक. ऊपर से कुछ भी नहीं पिलाएं, दूध, शहद, पानी कुछ नहीं, कुछ नहीं - मतलब कुछ नहीं.
     अगर आपका बच्चा रोए और दूध पिए, खेले तो बिलकुल चिंता की बात नहीं. अगर बच्चा लगातार या रुक रुक कर रोए और दूध न पिए तो चिंता की बात हो सकती है, डॉ से परामर्श करें. पर यदि आपका बच्चा बिलकुल रोए नहीं, दूध न पिए आठ दस घंटे तक, पेशाब नहीं करे आठ दस घंटे तक तो डॉ को तुरंत दिखाएं, आपका बच्चा गंभीर बीमार हो सकता है. मतलब बच्चे का न रोना ज्यादा गंभीर बात है.
कोई दवा नहीं लिखेंगे डॉ साहब?" बुआ जी ने चुप्पी तोडी.
नहीं, दवा तो हमको बहुत आती हैं. चाहता तो पर्चे के दोनों तरफ लिख सकता था, समय भी कम लगता इस प्रवचन से. पर उसकी अभी जरूरत नहीं है.
घंटी बज चुकी थी, मतलब बाहर जाने का संकेत हो गया था.
बाहर दो लोग और खड़े थे, यह जानने के लिए कि डॉ ने क्या बताया, क्या दवा लिखी. मम्मी समझाने की कोशिश कर रही थी, सबको. उन्हें बात समझ आ गई थी. पर बुआ जी को नहीं.
   चैंबर से किसी बच्चे की चीखने की आवाजें बता रहीं हैं कि वैक्सीन अभी लोड की जा रही है.
- प्रदीप शुक्ल
( क्रमशः जारी )

Comments

Popular posts from this blog

गांव का एक लड़का ( 11 ) मिडिल स्कूल में हमारे घुसने से तुरंत पहले एक गुरुजी प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत हुए थे l बड़ी तारीफ़ थी उनकी l दुर्भाग्य से मैं उनका विद्यार्थी होने से वंचित रह गया l गाढ़े रंग और ज़रा नाटे कद के गुरूजी बहुत सौम्य और भलेमानुष थे l अपने रंग और स्वभाव के अनुरूप ही मास्साब का पहनावा भी बेहद सरल था l मटमैले रंग की धोती और सफ़ेदी की झलक मारता मुचड़ा हुआ कुर्ता l अपने विद्यार्थियों के साथ अपने पुत्र को भी उन्होंने खूब मेहनत से पढ़ाया l बेटा भी पढ़ाकू निकला और पढ़ते - पढ़ते बड़ा अफसर हो गया l बड़ा अफसर मतलब आई ए एस अफसर l अफसर बनने के बाद पुत्र का गाँव आना जाना भी लगभग बंद हो गया l उस समय गाँव में टेलीफोन की सुविधा नहीं थी l लड़का चाहता तो हो सकती थी, पर लड़के को सरकार ने इतने सरकारी काम सौंप रखे थे कि सांस लेने की फुर्सत नहीं थी l जब बहुत दिनों तक मास्साब को लड़के के हालचाल नहीं मिले तो उन्होंने सोचा काम में व्यस्त होगा चलो हम ही दिल्ली चलते हैं l जनरल डिब्बे में ठुंस कर मास्साब जैसे तैसे दिल्ली पहुंचे l पता लगाते हुए कुछ दूर बस से, कुछ दूर पैदल चलकर आखिर गुरुजी पुत्र के...
5 Little Monkeys Jumping on the Bed - Mother Goose ( अवधी भावानुवाद ) पांच बंदरवा नान्ह केर सब कूदैं बिस्तर पर एकु गिरि गवा खाले, गूमडु निकरा वहिके सर अम्मा कहिनि, डाकटरु आवा बोलिसि आला धर अब कउनो बांदरु ना उलरी द्याखौ बिस्तर पर चारि बंदरवा नान्ह केर सब कूदैं बिस्तर पर एकु गिरि गवा खाले, गूमडु निकरा वहिके सर बप्पा कहिनि, डाकटरु आवा बोलिसि आला धर अब कउनो बांदरु ना उलरी द्याखौ बिस्तर पर तीनि बंदरवा नान्ह केर सब कूदैं बिस्तर पर एकु गिरि गवा खाले, गूमडु निकरा वहिके सर अम्मा कहिनि, डाकटरु आवा बोलिसि आला धर अब कउनो बांदरु ना उलरी द्याखौ बिस्तर पर दुई ठो बांदर नान्ह केर उई कूदैं बिस्तर पर एकु गिरि गवा खाले, गूमडु निकरा वहिके सर बप्पा कहिनि, डाकटरु आवा बोलिसि आला धर अब कउनो बांदरु ना उलरी द्याखौ बिस्तर पर एकु बंदरवा नान्ह केर यहु कूदै बिस्तर पर वहौ गिरि गवा खाले, गूमडु निकरा वहिके सर अम्मा कहिनि, डाकटरु आवा बोलिसि आला धर सारे बांदर पहुड़ि जायं अब सीधे बिस्तर पर - प्रदीप शुक्ल
गांव का एक लड़का ( 3 ) स्कूल जाने वाले बच्चे इस लायक हो जाते कि खेती के कामों में हाथ बंटाया करते l करते क्या जबरदस्ती करवाया जाता l स्कूल से लौटते ही घर में काम तैयार बैठे रहते l स्कूल जाने से पहले गोबर - करकट सब बच्चों के जिम्मे ही होता l चचेरे भाई बहनों को मिलाकर हम नौ बच्चे थे l सबसे बड़ी दीदी और छोटी बहनें घर में माँ और चाची का हाँथ बंटाती l हम बाकी बच्चे बाबा का l भाइयों में मैं दूसरे नंबर पर हूँ l मुझे और बड़े भईया की जोड़ी को ही बाहर के लगभग सारे काम करने पड़ते थे l काम के बंटवारे में अक्सर गोबर ही मेरे हाथ आता l जानवरों को चारा देना थोड़ा ज्यादा स्किल्ड काम था सो वह बड़े भाई के हिस्से में आता l दरवाजे पर झाडू लगाने के लिए हम अरहर के सूखे पौधे इस्तेमाल करते l जिन्हें ' झाँखर ' काहा जाता था l झाँखर का खरहंचा बना कर बड़ी आसानी से खड़े - खड़े झाडू लगा लेते l गर्मियों में कभी धूल ज्यादा होती तो पानी का छिडकाव कर खरहंचा मारते l गोबर हटाने का काम बाक़ी दिनों में तो आराम से हो जाता पर बारिश में यह काम बहुत तंग करता l एक हमारी बूढ़ी भैंस थी l वह इतना पतला गोब...