चींटे का पड़ोसी एक पड़ोसी लड़ने आया बना आग का गोला चींटे ने शक्कर खाई फिर मीठा - मीठा बोला चींटी आई, मुसकाई जब मीठा शरबत घोला जाते हुए पड़ोसी ने तब बदला अपना चोला - प्रदीप कुमार शुक्ल ( 2021 )
जो सपने हों, सब अपने हों, सपनों का मर जाना कैसा मन की बातें, चाहे तो आप कविता - कहानी, गद्य - पद्य भी कह सकते हैं.