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CAA के खिलाफ़ आंदोलन दरअसल NRC के लिए एंटीसीपेटरी बेल के माफ़िक है। मुझे यह ठीक भी लगता है। परंतु तभी तक जब तक यह अहिंसात्मक रहे और हिंदुओं के खिलाफ़ न हो। इसका असर भी तभी होगा।
हालांकि कुछ असर अभी से दिखना शुरू भी हो गया है। संसद में रौद्र रूप धारण किए ग्रुहमंत्री के बयान " 2024 से पहले पूरे देश मे एनआरसी हम लागू कर के रहेंगे ( ऊर्ध्वाधर तर्जिनी के भार सहित ) " के बाद एनआरसी का भ्रम दूर करने के लिए आज के समाचारपत्रों में विज्ञापन की भाषा आप देखेंगे तो आपको फ़र्क साफ़ नज़र आयेगा।
कुछ लोगों का मानना है कि एंटीसीपेटरी बेल की आवश्यकता नहीं है जब एफआईआर होगी तब न मुकदमा लड़िएगा? अभी बेकार मे लत्ते का साँप बना रहे हैं। कुछ कहते हैं, जब आग लगेगी तब कुआं खोदने से क्या लाभ होगा?
सयाने लोग समझा रहे हैं, देखिये इस CAA में किसी, मतलब किसी भारतवासी के लिए कोई परेशानी नहीं है, मल्लब बिलकुल्लै नहीं। अब जब एनआरसी के कायदे कानून सामने आएंगे तब न उसकी मेरिट-डिमेरिट पर बातचीत करिएगा।
बकिया, गांधी के देश मे हिंसा की कोई जगह बनती नहीं है। यह बात याद रखनी जरूरी है, समय की मांग भी यही है।

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