अरे बसंता!
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अरे बसंता
कहाँ परे हौ
हियाँ ख्यात मा पाँव पसारे
द्याखौ टीबी, बजटु आ रहा
वहिका पकरौ हुएं दुआरे
कहाँ परे हौ
हियाँ ख्यात मा पाँव पसारे
द्याखौ टीबी, बजटु आ रहा
वहिका पकरौ हुएं दुआरे
पियरी पहिने
बईठि म्याड़ पर
कहौ कि फोटू होईगै बिटिया
अम्मा यादि कै रहीं तुमका
आव घरै लागी हैं खटिया
बईठि म्याड़ पर
कहौ कि फोटू होईगै बिटिया
अम्मा यादि कै रहीं तुमका
आव घरै लागी हैं खटिया
जाव बजारै, लाव दवाई
कामु बनी ना खीस बघारे
कामु बनी ना खीस बघारे
सुनौ बसंता
कहौ आम ते
चाहे जेतना वहु बौराए
उनके कान प जुआँ न रेंगी
जउन बईठ हैं बजट बनाए
कहौ आम ते
चाहे जेतना वहु बौराए
उनके कान प जुआँ न रेंगी
जउन बईठ हैं बजट बनाए
गुठली मिली तो वहिका चूसेव
समझेव भईया राम पियारे
समझेव भईया राम पियारे
कहौ हवा ते
बहुतु न उछरौ
आवति होई बिकासु क जंगल
कालिख पोती तुम्हरे मुँह मा
होई रोजु हियाँ पर दंगल
बहुतु न उछरौ
आवति होई बिकासु क जंगल
कालिख पोती तुम्हरे मुँह मा
होई रोजु हियाँ पर दंगल
जाव बसंता हुएं सहर मा
हियाँ न घूमौ मारे मारे
हियाँ न घूमौ मारे मारे
- प्रदीप शुक्ल
( अवधी नवगीत संग्रह ' यहै बतकही है ' से )
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