चीची का सपना
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लेट गया था चूहा चीची
लेटे लेटे आँखें मीचीं
लेटे लेटे आँखें मीचीं
लगा देखने सुन्दर सपना
सब कुछ समझ रहा था अपना
सब कुछ समझ रहा था अपना
देखा वह लड़ गया चुनाव
उसके पीछे सारा गांव
उसके पीछे सारा गांव
सब चूहों का है वह मुखिया
उसने ताज पहन ही लिया
उसने ताज पहन ही लिया
लगा हुआ है अब दरबार
बस चूहों की है भरमार
बस चूहों की है भरमार
वही कहानी बिल्ली वाली
कौन करे उससे रखवाली
कौन करे उससे रखवाली
कोई घंटी बाँध न पाए
कुछ वीरों ने प्राण गंवाए
कुछ वीरों ने प्राण गंवाए
चीची बोला, सारे सुनो
बात हमारी मन से गुनो
बात हमारी मन से गुनो
अब आया है नया ज़माना
घंटी किस्सा हुआ पुराना
घंटी किस्सा हुआ पुराना
हम सब मोबाइल रक्खेंगे
बिल्ली की लोकेशन देंगे
बिल्ली की लोकेशन देंगे
देखो होगी ड्यूटी जिसकी
जिम्मेदारी होगी उसकी
जिम्मेदारी होगी उसकी
उसको ही नेटपैक मिलेगा
लेकिन एफ बी नहीं चलेगा
लेकिन एफ बी नहीं चलेगा
वाट्स ऐप पर है पाबंदी
लत हर हालत में है गंदी
लत हर हालत में है गंदी
तभी मच गई चिल्लम चिल्ली
देखा चली आ रही बिल्ली
देखा चली आ रही बिल्ली
चीची तुरत नींद से जागा
और उछल कर फ़ौरन भागा.
और उछल कर फ़ौरन भागा.
- प्रदीप शुक्ल
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