श्रीमान राजेन्द्र यादव जी ( हंस वाले नहीं ) ने तकरीबन डेढ़ दशक पहले स्टार्ट अप इंडिया के तहत व्यवसाय शुरू किया था l " हर बीमारी ( इलाज ) दस रुपये में " आरम्भ करने वाले राजेन्द्र ने पंद्रह बरस पश्चात भी दाम नहीं बढाए l ( यह ठीक उसी तर्ज पर है जैसे श्रीमान लालू यादव जी ने रेलवे के साथ किया था l श्रीमान राजेन्द्र जी को भी हार्वर्ड में व्याख्यान के लिए बुलाने पर विचार किया जा रहा है l ) वैश्विक आर्थिक मंदी, इन्फ्लेशन और महंगाई को धता बताते हुए सर्विस सेक्टर में उत्तरोत्तर प्रगति का यह एक सर्वथा अनूठा उदाहरण है l सर्विस सेक्टर की इस विशेष चिकित्सा शाखा का विकास आश्चर्यचकित कर देने वाला है l हमारे यशस्वी प्रधानमन्त्री ने संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देशित किया है कि ब्रिज कोर्स के द्वारा इस शाखा का तुरंत विकास किया जाय l हम पूरे विश्व के सामने हम इस मॉडल को जल्द से जल्द प्रदर्शित करने वाले हैं l
चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल : कुछ नोट्स ( 2 ) " साढ़े नौ का टाइम लिखा रखा है, दस बजने वाले हैं अभी तक डॉ नहीं बैठे हैं. क्या तमाशा बना रखा है," शगुन के पापा गुस्से में रिसेप्शनिष्ट लड़की को हडकाए जा रहे हैं. भैया, आने वाले हैं बस डॉ, तब तक आप बच्चे को पानी से स्पंज करा दीजिए. सिस्टर जी बच्चे का बुखार नाप कर स्पन्जिंग करवाइए, गुनगुने पानी से. शगुन की मम्मी शगुन के माथे पर पट्टियां तो रख सकती हैं परन्तु बुखार में बच्चे को नहलाना ... न बाबा न. निमोनिया जकड़ लेगी सीने को. इनका बच्चा तो है नहीं, जो मन में आया बोल दिया. मम्मी जी धीरे धीरे भुनभुना रही हैं. चादर से और लपेट दिया बच्चे को. " डॉ साब साढ़े दस बजे आएंगे " रिसेप्शनिष्ट ने फोन रखते हुए चिल्लाकर कहा. ताकि सभी सुन ले. अभी वो बाहर गए हुए हैं. चलो कहीं और दिखा लेते हैं, डॉ तो अभी यहाँ आए नहीं. पिता जी के प्रस्ताव को माता जी ने धीरे से ठुकरा दिया, " नहीं. शगुन की दवा इन्ही डॉ की सूट करती है." मैं तो बच्चों का हॉस्पिटल हूँ, मुझे यह बात पता है कि रिसेप्शनिष्ट झूठ बोल रही है. डॉ, मेरे कैम्पस में घर पर ही ...
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