श्रीमान राजेन्द्र यादव जी ( हंस वाले नहीं ) ने तकरीबन डेढ़ दशक पहले स्टार्ट अप इंडिया के तहत व्यवसाय शुरू किया था l " हर बीमारी ( इलाज ) दस रुपये में " आरम्भ करने वाले राजेन्द्र ने पंद्रह बरस पश्चात भी दाम नहीं बढाए l ( यह ठीक उसी तर्ज पर है जैसे श्रीमान लालू यादव जी ने रेलवे के साथ किया था l श्रीमान राजेन्द्र जी को भी हार्वर्ड में व्याख्यान के लिए बुलाने पर विचार किया जा रहा है l ) वैश्विक आर्थिक मंदी, इन्फ्लेशन और महंगाई को धता बताते हुए सर्विस सेक्टर में उत्तरोत्तर प्रगति का यह एक सर्वथा अनूठा उदाहरण है l सर्विस सेक्टर की इस विशेष चिकित्सा शाखा का विकास आश्चर्यचकित कर देने वाला है l हमारे यशस्वी प्रधानमन्त्री ने संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देशित किया है कि ब्रिज कोर्स के द्वारा इस शाखा का तुरंत विकास किया जाय l हम पूरे विश्व के सामने हम इस मॉडल को जल्द से जल्द प्रदर्शित करने वाले हैं l
गांव का एक लड़का ( 11 ) मिडिल स्कूल में हमारे घुसने से तुरंत पहले एक गुरुजी प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत हुए थे l बड़ी तारीफ़ थी उनकी l दुर्भाग्य से मैं उनका विद्यार्थी होने से वंचित रह गया l गाढ़े रंग और ज़रा नाटे कद के गुरूजी बहुत सौम्य और भलेमानुष थे l अपने रंग और स्वभाव के अनुरूप ही मास्साब का पहनावा भी बेहद सरल था l मटमैले रंग की धोती और सफ़ेदी की झलक मारता मुचड़ा हुआ कुर्ता l अपने विद्यार्थियों के साथ अपने पुत्र को भी उन्होंने खूब मेहनत से पढ़ाया l बेटा भी पढ़ाकू निकला और पढ़ते - पढ़ते बड़ा अफसर हो गया l बड़ा अफसर मतलब आई ए एस अफसर l अफसर बनने के बाद पुत्र का गाँव आना जाना भी लगभग बंद हो गया l उस समय गाँव में टेलीफोन की सुविधा नहीं थी l लड़का चाहता तो हो सकती थी, पर लड़के को सरकार ने इतने सरकारी काम सौंप रखे थे कि सांस लेने की फुर्सत नहीं थी l जब बहुत दिनों तक मास्साब को लड़के के हालचाल नहीं मिले तो उन्होंने सोचा काम में व्यस्त होगा चलो हम ही दिल्ली चलते हैं l जनरल डिब्बे में ठुंस कर मास्साब जैसे तैसे दिल्ली पहुंचे l पता लगाते हुए कुछ दूर बस से, कुछ दूर पैदल चलकर आखिर गुरुजी पुत्र के...
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