श्रीमान राजेन्द्र यादव जी ( हंस वाले नहीं ) ने तकरीबन डेढ़ दशक पहले स्टार्ट अप इंडिया के तहत व्यवसाय शुरू किया था l " हर बीमारी ( इलाज ) दस रुपये में " आरम्भ करने वाले राजेन्द्र ने पंद्रह बरस पश्चात भी दाम नहीं बढाए l ( यह ठीक उसी तर्ज पर है जैसे श्रीमान लालू यादव जी ने रेलवे के साथ किया था l श्रीमान राजेन्द्र जी को भी हार्वर्ड में व्याख्यान के लिए बुलाने पर विचार किया जा रहा है l ) वैश्विक आर्थिक मंदी, इन्फ्लेशन और महंगाई को धता बताते हुए सर्विस सेक्टर में उत्तरोत्तर प्रगति का यह एक सर्वथा अनूठा उदाहरण है l सर्विस सेक्टर की इस विशेष चिकित्सा शाखा का विकास आश्चर्यचकित कर देने वाला है l हमारे यशस्वी प्रधानमन्त्री ने संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देशित किया है कि ब्रिज कोर्स के द्वारा इस शाखा का तुरंत विकास किया जाय l हम पूरे विश्व के सामने हम इस मॉडल को जल्द से जल्द प्रदर्शित करने वाले हैं l
!! अरविन्द - नामा !! आओ अरविन्द केज़रीवाल को आंकते हैं ! पहले थोड़ा पीछे झांकते हैं !! ( 1 ) बात करते हैं पिछले साल की वही शुरूआती जन लोकपाल की एक नया चेहरा टी वी पर अक्सर आने लगा धीरे धीरे प्राइम टाइम पर छाने लगा कुछ तो मीडिया के बुद्धिजीवी प्रभावित कुछ टी आर पी का चक्कर बन्दा खड़ा रहा डटकर मामूली सा इंसान चौखाने की शर्ट पैंट से बाहर लटकती हुई दो सौ रुपये वाला चश्मे का फ्रेम पचास किलो का चवन्नी छाप आदमी मीडिया की तवज्जो से मठाधीश बौखला गए वो कुछ भी कहता लोग पूछते तुम कौन ? वह बोलता - आम आदमी तो ?? तो क्या तुम हमसे सवाल करोगे ? गन्दी नाली के कीड़े ( गटर स्नाइप्स ) हिम्मत है तो चुनाव लड़ो एक करोड़ तो चुनाव प्रचार में ही लगते हैं दारु शारू , दुनिया भर का ऊपर से खर्चा दस करोड़ !! है औकात तुम्हारी उसके बाद विधायक खरीदने / बचाने का पैसा अलग कुछ पता भी है तुम्हे चले आये मुह उठा कर जी हम भी चुनाव लड़ेंगे जाओ चुनाव जीतना फिर बताना ( 2 ) चुनाव जीत गए तो कौन सा तीर मार लिया पिछले तिरसठ सालों से हम ने न जाने कितने चुनाव जीते हैं कितनी सरकारें चलायीं / गिरायीं अब तुम चला...
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