धरती का बच्चा
नन्हा बीज आलसी था
था सबसे छिपकर सोया
चंचल बहती हवा, धूप के
सपनों मे था खोया
था सबसे छिपकर सोया
चंचल बहती हवा, धूप के
सपनों मे था खोया
नींद खुली, आँखों को मलता
जब वह बाहर आया
धूल, धुआँ, चिड़चिड़ी हवा को
पाकर वह घबराया
जब वह बाहर आया
धूल, धुआँ, चिड़चिड़ी हवा को
पाकर वह घबराया
लगा छींकने, खाँसा फिर
बीमार हो गया गोया
नन्हा बीज बना जब पौधा
बहुत दिनों तक रोया
बीमार हो गया गोया
नन्हा बीज बना जब पौधा
बहुत दिनों तक रोया
- प्रदीप कुमार शुक्ल
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