होरी मा दून्हो जने, बेमतलब चिल्लायँ
ख़ास बिरावैं दूरि ते, आम हियाँ बौरायँ
बहियाँ गहे बसंत की, फागुन आया द्वार
अब बूढ़े हेमंत ने, वर्दी धरी उतार l
बहियाँ गहे बसंत की,
फागुन आया द्वार
अब बूढ़े हेमंत ने, वर्दी धरी उतार l
ख़ास बिरावैं दूरि ते, आम हियाँ बौरायँ
बहियाँ गहे बसंत की, फागुन आया द्वार
अब बूढ़े हेमंत ने, वर्दी धरी उतार l
बहियाँ गहे बसंत की,
फागुन आया द्वार
अब बूढ़े हेमंत ने, वर्दी धरी उतार l
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