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अंकल शैम
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बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में शहर के रसूखदार नेता और प्रसिद्द व्यवसायी लाला हरकिशन लाल गौबा के घर जन्मे कन्हैया लाल गौबा जब इंगलैंड से वकालत पढ़कर लाहौर लौटे तो यहाँ ' अंग्रेजों भारत छोड़ो ' और ' ले के रहेंगे पाकिस्तान ' की शुरुआत होनी शेष थी l लाला हरकिशन लाल का लाहौर में जो जलवा था उससे भी ज्यादा जलवा, के एल गौबा का होने वाला था l के एल गौबा की लाहौर हाईकोर्ट में वकालत चल निकली और खूब चली l हंगामा पसंद गौबा ने उसी समय एक मुस्लिम युवती से विवाह कर लिया और लाहौर में हंगामा बरपा हो गया l
उसी दौरान एक अमेरिकी महिला कैथरीन मेयो का उपन्यास नुमाया हुआ, " मदर इंडिया " जिसमे उन्होंने हिन्दुस्तान की बहुत छीछालेदर की l गांधी जी ने उसे ' नाबदान के इन्स्पेक्टर की रिपोर्ट ' कहा l उपन्यास के जवाब में बहुत सारी किताबें आईं, फ़ादर इंडिया ' ' सिस्टर इंडिया ' अनहैप्पी इंडिया ' l लेकिन गौबा साहब का जवाब सबसे शानदार था l उन्होंने लाला लाजपत राय से कहा कि आपके अनहैप्पी इंडिया लिखने से इंडिया बहुत दिनों तक अनहैप्पी ही रहेगा l माकूल जवाब तो तब होगा जब हम अमेरिका का नाबदान दुनिया को दिखाएं l उन्होंने केवल दस हफ़्तों में किताब लिखी " अंकल शैम " वह भी बिना अमेरिका में एक बार भी कदम रखे हुए l इसमें उन्होंने अमेरिकी गलियों की बजबजाती नालियों का विवरण दुनिया के सामने पेश किया l
1929 - 1930 में छ: रुपये कीमत वाली किताब की बिक्री लाखों में हुई l गौबा खुद कहते हैं कि 20000 प्रतियाँ तो लाहौर कांग्रेस अधिवेशन के पहले दिन ही बिकीं l गौबा साहेब ने खूब पैसे कमाए और लाहौर में नहर किनारे खूब बड़ा बँगला बनवाया l
अमेरिका के प्रतिष्ठित जर्नल ' फॉरेन अफ़ेयर ' में इसका रिव्यू लिखते हुए इतिहासकार विलियम लैंगर ने खूब लानत मलानत की l इससे जाहिर हुआ कि जो बात गौबा साहब अमेरिका को पहुंचाना चाहते थे वह पहुँच गई l यह इस बात से भी पता चलता है कि " अंकल शैम " की कॉपी जब गौबा साहब ने " मदर इंडिया " की लेखिका कैथरीन मेयो को भिजवाई तो इस पर लिखा .... " एक नाबदान इंस्पेक्टर को - एक नाबदान इंस्पेक्टर द्वारा "
( " The People Next Door " पढ़ते हुए )
- प्रदीप शुक्ल
( नोट : हंगामा पसंद के एल गौबा कालान्तर में खुर्शीद लतीफ़ गौबा हो गए l केवल तीन हफ्ते पाकिस्तान रहने के बाद के एल गौबा बम्बई चले आए और यहीं उन्होंने सत्तर के दशक में प्राण त्यागे l खुशवंत सिंह बताते हैं कि हंगामा पसंद गौबा, जिनके पीछे आधा लाहौर चलता था, उनकी आख़िरी यात्रा में दर्जन भर लोग भी न जुट सके )

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