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तकरीबन पच्चीस लाख साल पहले एक दो पैरों पर चलने वाले पशु ने ( जो बंदरों और कपियों से अलग दिखता था ) इस गोले पर कदम रखा l वह समूहों में रहता था, शिकार करता था और जिसने रहने के लिए घर जैसी संरचनाएं भी बनाईं l पर इतिहासकार उसे हमारा सीधा पूर्वज नहीं मानते l हमारी मानव जाति का इतिहास वहाँ से शुरू नहीं होता है l यह आस्ट्रैलोपिथिकस थे, होमो नहीं हो सके थे अभी तक l

मानव इतिहास शुरू होता है करीब अठारह - बीस लाख साल पहले जन्मे होमो इरेक्टस - निएंडरथल मैन से, जब इनमे सामाजिकता के लक्षण दिखाई पड़े l इतिहासकारों को एक निएंडरथल मैन के अवशेष मिले जिसका दाहिना हाँथ कटा हुआ था और जो हाँथ कटने के बाद भी बहुत दिनों तक जीवित रहा l मतलब कि शिकार के लिए अनुपयोगी होते हुए भी उसके साथियों ने उसे ज़िंदा रखा l मानवता की शुरुआत हो चुकी थी l

इन्ही मानव बन रहे पशुओं की किसी शाखा से आज का मानव निकला l इसमें कोई शक की गुंजाईश नहीं है कि हमारी पूरी आधुनिक मानव जाति के आदि पूर्वज अफ्रीका के जंगलों से निकले और पूरी दुनिया में फ़ैल गए l कहते हैं कि पहले आधुनिक मानव और आज के उत्तर आधुनिक इंसान में इन लाखों वर्षों के कालान्तर के बावजूद अभी तक शारीरिक संरचना में कुछ ख़ास बदलाव नहीं आया है l अब तेजी से जो प्रगति होती हुई दिखाई पड़ती है यह हमारी पुरानी पीढ़ियों का संचित ज्ञान है जो हर पीढ़ी में जुड़ता चला आया है l

बहुत हो चुका ज्ञान - विज्ञान l आने वाली पीढ़ियों को अब हम नफरतों का जखीरा दे कर जाने वाले हैं l हमारे पुरखों के दिए हुए ज्ञान का इस्तेमाल कर हम उन्ही के जीवदृव्य ( जर्म प्लाज्म ) को इस गोले से मिटा देंगे l

दूध रोटी खिलाते हुए अम्मा ने बचपन में कहा था, " बेटा, इंसान में ही भगवान् हैं "

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