सजने लगी अयोध्या
ख़त्म करो बनवास
कि जनता बैठी है दिल थाम
सजने लगी अयोध्या
शायद लौट रहे हैं राम
कि जनता बैठी है दिल थाम
सजने लगी अयोध्या
शायद लौट रहे हैं राम
मारे गए
निशाचर होंगे,
होंगे कुछ बंदी
चली आ रही लेकिन
चढ़कर पुष्पक पर मंदी
निशाचर होंगे,
होंगे कुछ बंदी
चली आ रही लेकिन
चढ़कर पुष्पक पर मंदी
रक्तपिपासु डंकिनी मंदी
दुनिया में बदनाम
दुनिया में बदनाम
लिंचिंग कर के नहीं
समर कर
रघुवर हैं आये
लेकिन प्रजा यहाँ दोनों को
माला पहनाये
समर कर
रघुवर हैं आये
लेकिन प्रजा यहाँ दोनों को
माला पहनाये
अच्छन मियाँ लुके हैं पीछे
आगे राजाराम
आगे राजाराम
वैदेही की देह
आग से भी
जब नहीं जली
मुंह पर रख कर हाथ
तभी मुस्काई रामकली
आग से भी
जब नहीं जली
मुंह पर रख कर हाथ
तभी मुस्काई रामकली
उल्टे पाँव तुम्हे वापस
आना है जंगल धाम
आना है जंगल धाम
- प्रदीप कुमार शुक्ल
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