दादी घर - नानी घर
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गर्मी की छुट्टी नानी घर
सर्दी की छुट्टी दादी घर
दादी घर - नानी घर मुझको भूल नहीं पाया
सर्दी की छुट्टी दादी घर
दादी घर - नानी घर मुझको भूल नहीं पाया
गर्मी में नानी के घर में एसी होता था
सर्दी में दादी के घर गुड़ देसी होता था
चाट पकौड़े थे नानी घर
दिन भर दौड़े थे दादी घर
हर छुट्टी में दोनों का घर मन पर था छाया
सर्दी में दादी के घर गुड़ देसी होता था
चाट पकौड़े थे नानी घर
दिन भर दौड़े थे दादी घर
हर छुट्टी में दोनों का घर मन पर था छाया
नानी, मामा के संग अब तो चली गईं बैंगलोर
मामी को अच्छा न लगे अब बच्चों का यह शोर
नहीं रहा वह नानी का घर
अब तो है वह मामी का घर
नानी कहती बिट्टू, " कब से तू नहीं आया "
मामी को अच्छा न लगे अब बच्चों का यह शोर
नहीं रहा वह नानी का घर
अब तो है वह मामी का घर
नानी कहती बिट्टू, " कब से तू नहीं आया "
दादी खुद रहने आई है मेरे अपने घर
चुप रहती है दादी, जब से दादा गए गुजर
याद करे वह रोज गांव घर
सिमट गई कमरे में आकर
पापा पूछें रोज शाम को, अम्मा खाना खाया?
चुप रहती है दादी, जब से दादा गए गुजर
याद करे वह रोज गांव घर
सिमट गई कमरे में आकर
पापा पूछें रोज शाम को, अम्मा खाना खाया?
- प्रदीप शुक्ल
( रिपोस्ट )
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