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यदि होता किन्नर नरेश मैं राज महल में रहता
सोने का सिंहासन होता सिर पर मुकुट चमकता
बंदीजन .....
छोटे पुत्र ने टोकते हुए पूछा, ' वैसा मुकुट जो रामलीला में पहनते हैं?' कितने भोंदू लगते आप. जैसे कभी - कभी नेता लोग बालों में मुकुट फँसाये और एक प्लास्टिक की तलवार लिए दीखते हैं मंच पर.
' अब नरेश नहीं प्रधानमन्त्री होते हैं बेटा, यह तो पुराने जमाने की बात है. ' पिताजी ने कविता को विराम देते हुए छुटकू को समझाया.
' अच्छा पापा, मेरा हिन्दी का होमवर्क करा दीजिये, आप तो हिन्दी एरा के हैं. मेरी हिन्दी ज़रा वीक है.' छुटकू, पापा के घूरने की ओर बिलकुल तवज्जो न देते हुए बैग को लगभग पटकते हुए बोला.
टाइटिल है, " यदि मैं भारत का प्रधानमन्त्री होता "
टाइटिल नहीं, शीर्षक
आगे तुम खुद लिखो. मुझे ऑफिस जाना है.
पर, पापा .....
" यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता "
पहली बात तो यह कि मुझे भारत का प्रधानमन्त्री बनाया ही क्यों जाए? मैं अच्छा खासा स्कूल जाता हूँ, मजे से खेलता हूँ और चादर तान कर दस घंटे सोता हूँ. चार घंटे की नींद से मेरा काम होगा नहीं. मैं अमेरिका जा कर उस बूढ़े आदमी का चुनाव प्रचार करने के बजाय जल्दी से अपना होमवर्क निपटा कर 'डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया' पढ़ना ज्यादा पसंद करूंगा.
एक बात और, मैं दिन में सात बार कपड़े नहीं बदलना चाहता. न बाबा न. लिहाजा मैं भारत का प्रधानमन्त्री बनना ही नहीं चाहता, बात ख़त्म.
पिताजी ने जल्दी-जल्दी ऑफिस जाने में ही अपनी भलाई समझी.

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