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अकेले बुदबुदाना चाहता हूँ
मैं खुद को गुनगुनाना चाहता हूँ
अभी संदूक से लाया हूँ अल्बम
ज़रा सा मुस्कुराना चाहता हूँ
पुराने जख्म अब भरने लगे हैं
नई फिर चोट खाना चाहता हूँ
मुझे मालूम है अपनी लियाक़त
मगर मैं आज़माना चाहता हूँ
समय हो, दोस्त हों, हो चाय का कप
वही गुजरा ज़माना चाहता हूँ
कहीं मिल जाए जो बचपन का साथी
ज़रा सा गुदगुदाना चाहता हूँ
तुम्हारे बिन अकेला हो गया था
कि फ़िर पहलू में आना चाहता हूँ
पुरानी बंदिशें सब तोड़ने को
नया कोई बहाना चाहता हूँ
तुम्हारी वो अदा वो शोख़ नखरे
कसम से फिर उठाना चाहता हूँ
चलो ऐसा करो, तुम रूठ जाओ
तुम्हे फिर से मनाना चाहता हूँ
बड़ी शिद्दत से जिनके ख्वाब देखे
उन्ही को बस भुलाना चाहता हूँ
जहां पर रुकी थी अपनी कहानी
वहीं से फ़िर सुनाना चाहता हूँ
फेंक हीरा उठा लिया कंकण
यही बस मैं बताना चाहता हूँ
नशा इंग्लिश से अब चढ़ता नहीं है
वही ठर्रा मंगाना चाहता हूँ
बड़ा गहरा है आँखों का समंदर
उसी में डूब जाना चाहता हूँ
पुराने सब गिले शिकवे तुम्हारे
समंदर में बहाना चाहता हूँ
कहाँ मैं बोल पाया था कभी यह
तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ
तुम्हे पाकर छलक आये हैं आंसू
तुम्ही से पर छुपाना चाहता हूँ

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