कहाँ हौ भईया चौकीदार?
चौराहे पर देसु खड़ा है चितवै चारिहु वार
कहाँ हौ भईया चौकीदार?
कहाँ हौ भईया चौकीदार?
तुमका हम पगड़ी पहिरावा हाथ म दीनेन डंडा
तुम पिटरोल म आगि लगायो पाथि रहेन हम कंडा
भूखी गाय की होय आरती अम्मा हैं बीमार
कहाँ हौ भईया चौकीदार?
तुम पिटरोल म आगि लगायो पाथि रहेन हम कंडा
भूखी गाय की होय आरती अम्मा हैं बीमार
कहाँ हौ भईया चौकीदार?
खूनु पसीना केरि कमाई तुमका सौंपति जाई
कहे रहौ तुम हम ना खइबे अउरो कोउ न खाई
बड़ा गजबु होई जाई काका टूटी जौ अतबार
कहाँ हौ भईया चौकीदार?
कहे रहौ तुम हम ना खइबे अउरो कोउ न खाई
बड़ा गजबु होई जाई काका टूटी जौ अतबार
कहाँ हौ भईया चौकीदार?
झूठ न बोलेव कसम खाय हौ गंगा जी का पानी
औ गरीब का खूनु कहूं जो पीगे ई अम्बानी
गंगा मईया नाहिं बोलइहैं तुमका अगली बार
कहाँ हौ भईया चौकीदार?
औ गरीब का खूनु कहूं जो पीगे ई अम्बानी
गंगा मईया नाहिं बोलइहैं तुमका अगली बार
कहाँ हौ भईया चौकीदार?
- प्रदीप शुक्ल
( चितवै - देखे, चारिहु वार - चारों तरफ, दीनेन - दिया, कंडा - गोबर के उपले, अतबार - ऐतबार, पीगे - पी गए )
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