कहो चिरैया
कहो चिरैया
कहाँ चली तुम
अपना पिंजड़ा छोड़ कर
कहाँ चली तुम
अपना पिंजड़ा छोड़ कर
नहीं तुम्हे
ऑफिस जाना है
न ही तुम्हे स्कूल
देख रहा हूँ बहुत देर से
यहीं रही हो झूल
इधर उधर
बस देख रही हो
गर्दन अपनी मोड़ कर
ऑफिस जाना है
न ही तुम्हे स्कूल
देख रहा हूँ बहुत देर से
यहीं रही हो झूल
इधर उधर
बस देख रही हो
गर्दन अपनी मोड़ कर
मेरी तो
बस आती होगी
मुझको जाना होगा
तुम भी कुछ पढ़ – लिख लो वरना
फिर पछताना होगा
इम्तेहान में
अपना पेपर
आ जाओगी गोड़ कर
बस आती होगी
मुझको जाना होगा
तुम भी कुछ पढ़ – लिख लो वरना
फिर पछताना होगा
इम्तेहान में
अपना पेपर
आ जाओगी गोड़ कर
चुपके से तुम
छत पर जाओ
मिल जायेंगे दाने
आ जाऊँगा मैं भी
तुमसे मिलने किसी बहाने
मुझको तुम
सिखलाना कैसे
तिनके रखती जोड़ कर
छत पर जाओ
मिल जायेंगे दाने
आ जाऊँगा मैं भी
तुमसे मिलने किसी बहाने
मुझको तुम
सिखलाना कैसे
तिनके रखती जोड़ कर
तेरा घर
जब बन जाए तो
मुझको तुम बतलाना
भूल न जाना गृह प्रवेश में
पर तुम मुझे बुलाना
कोई और छुएगा
तो रख दूंगा
हाथ मरोड़ कर
जब बन जाए तो
मुझको तुम बतलाना
भूल न जाना गृह प्रवेश में
पर तुम मुझे बुलाना
कोई और छुएगा
तो रख दूंगा
हाथ मरोड़ कर
कहो चिरैया
कहाँ चली तुम
अपना पिंजड़ा छोड़ कर
कहाँ चली तुम
अपना पिंजड़ा छोड़ कर
- प्रदीप कुमार शुक्ल
( ' कहो चिरैया ' बालगीत संग्रह से )
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