काका
चारि साल काका तुम गरजेव
पंचये साल म रहेव चुपाय
बोले रहौ नहीं तौ काका
तुमका सब देहैं अघवाय
पंचये साल म रहेव चुपाय
बोले रहौ नहीं तौ काका
तुमका सब देहैं अघवाय
तुम्हरै पिंजरा, तुम्हरै तोता
सबका काहे मूडु पिराय
अपने पिंजरा के अन्दर उई
चाहै लड़यं चहे बेल्हरायं
सबका काहे मूडु पिराय
अपने पिंजरा के अन्दर उई
चाहै लड़यं चहे बेल्हरायं
तुम चुनाव की करौ तयारी
तोतन का तुम रहेव लड़ाय
ओट परी तुमही का काका
बाक़ी सबकी धूरि उड़ाय
तोतन का तुम रहेव लड़ाय
ओट परी तुमही का काका
बाक़ी सबकी धूरि उड़ाय
बल्लभ बाबा की मूरति तुम
ठाढ़ि कई देहेव बादरु फारि
भूख के मारे हियाँ आदमी
चाहे मरै रोजु दुई चारि
ठाढ़ि कई देहेव बादरु फारि
भूख के मारे हियाँ आदमी
चाहे मरै रोजु दुई चारि
रैफल तुम अच्छी लाये पर
अम्बानी क देहेव पकराय
नाल तुमरिही तन होइगै है
कउनेव बिधि ते देव झुकाय
अम्बानी क देहेव पकराय
नाल तुमरिही तन होइगै है
कउनेव बिधि ते देव झुकाय
नहीं कहूं जो फायर होइगै
छप्पन इंच देई पिचकाय
मौक़ा अबे छीनि कै रैफल
एच ए एल का देव थमाय
छप्पन इंच देई पिचकाय
मौक़ा अबे छीनि कै रैफल
एच ए एल का देव थमाय
आगि लागि पिटरोल म काका
ठंडक मा यहु आई काम
तपता तापौ घर मा बइठौ
मुहं ते लेव राम का नाम
ठंडक मा यहु आई काम
तपता तापौ घर मा बइठौ
मुहं ते लेव राम का नाम
मुला अजोधा मा काका तुम
नींव क ईंटा देव धराय
बस इतने ते कारजु होई
पूरा हिन्दू गिरी बम्बाय
नींव क ईंटा देव धराय
बस इतने ते कारजु होई
पूरा हिन्दू गिरी बम्बाय
- प्रदीप कुमार शुक्ल
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