मौन हुए हम, जब वह आया
घर में डोलूँ बन कर छाया
कैसे कहूं कि हूँ आजाद
क्या सखि साजन? न, ' अवसाद '
घर में डोलूँ बन कर छाया
कैसे कहूं कि हूँ आजाद
क्या सखि साजन? न, ' अवसाद '
बाहर निकलें मूछें ऐंठे
घर में भगमच्छर कर बैठे
उनको बिलकुल शरम न आई
क्या सखि साजन?
' सीबीआई '
घर में भगमच्छर कर बैठे
उनको बिलकुल शरम न आई
क्या सखि साजन?
' सीबीआई '
- प्रदीप कुमार शुक्ल
उसने मुझे अचानक छुआ
दिल फिर कैसा - कैसा हुआ
मन में आया उसे घसीटूं
क्या सखि साजन? न सखि, ' मी टू '
दिल फिर कैसा - कैसा हुआ
मन में आया उसे घसीटूं
क्या सखि साजन? न सखि, ' मी टू '
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