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अदृश्य हाथ
' हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है l' यह कहावत कोई ऐसे ही नहीं बन गई होगी l बार - बार इसे कसौटी पर कसा गया होगा l लेकिन उस औरत के पीछे किसी आदमी का अदृश्य हाथ भी हो सकता है यह मानने को दुनिया तैयार नहीं होती l
ताजा मामला पाकिस्तानी इमरान खान की कामयाबी का है l लोगों का कहना है कि उनकी कामयाबी के पीछे किसी एक औरत का हाथ तलाश करना बेमानी है l
पर मैं यहाँ आपको उस एक औरत का हाथ दिखाने की कोशिश करूंगा जिसके बारे में पाकिस्तान की मीडिया का मानना है कि उन्हें वोट करने वाली जनता का काफी हिस्सा इस कहानी पर यकीन करता है l और फिर उसके पीछे के अदृश्य हाथ को देखेंगे l
तो साहबान, उस औरत का नाम है ' बुशरा खान ' जो अभी कुछ दिन पहले तक बुशरा रियाज़ वत्तू के नाम से जानी जाती थीं l बुशरा जी को अचानक एक रात सोते हुए सपना आया l सपने में साक्षात पैगम्बर मुहम्मद ने दर्शन दिए और काफी देर तक बातें की l आधी रात को खर्राटे लेते हुए बगल में सोये अपने खाविंद को उन्होंने झकझोर कर जगाया l उसने प्यार की एक झप्पी लेकर मुहम्मद साहेब का पैगाम अपने खाविंद को बताया कि मुझे आदेश हुआ है कि मैं जल्द से जल्द इमरान खान से शादी कर लूं l इससे वह प्रधानमंत्री बन जायेंगे l अवाक बैठे पति को उसने पैगम्बर की एक और बात बताई कि ऐसा होने पर पाकिस्तान के सितारे बुलंदी पर होंगे l यह बात उसने जाग गए पति से दो - तीन बार दुहराई l बात बन गई l
आगे के रास्ते में ज्यादा अड़चनें नहीं थी l मोहतरमा की मुलाक़ात खां साहेब से जल्द ही हो गई l पांच बच्चों की माँ बुशरा बेग़म ने खां साहेब से कहा कि जल्दी कीजिये आखिरी तारीख पांच जनवरी है l कहते हैं एक जनवरी के आस - पास खां साहेब और बेग़म साहिबा ने पैगम्बर का पैगाम कुबूल फरमाया l
तो साहेबान यह तो था इमरान खान की कामयाबी के पीछे एक औरत का हाथ l अब आइये ज़रा उस अदृश्य हाथ को महसूस करते हैं l बुशरा के पहले शौहर पर ज़रा गौर फरमाइए l बेचारे को आधी रात में सोते से जगा कर बीवी ने जब यह कहा कि उसे इमरान खान से शादी करनी है तो सोचिए उसके जेहन में क्या चल रहा होगा l
असली कुर्बानी तो उस शौहर ने दी है इमरान की कामयाबी के लिए l हालांकि उसका कहना है कि वह सब कुछ अपने देश को बचाने के लिए कर रहा है l इसे कहते हैं देशभक्ति l
हिन्दुस्तान के गाय - गोबर करने वाले देशभक्तों, सीखो उस अदृश्य आदमी से और सलाम करो उस अदृश्य हाथ को l
( चित्र में खां साहेब की कामयाबी के पीछे ( शरीर के पीछे नहीं ) उस औरत का हाथ आप आसानी से देख सकते हैं l पर उस औरत के पीछे अदृश्य आदमी के उस अदृश्य हाथ की आप बस कल्पना ही कर सकते हैं l )
- प्रदीप शुक्ल

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