पिछले साल की मई से खेत में जो बोरिंग कराने का सिलसिला शुरू हुआ वह आज तक जारी है l चार जगह बोरिंग हो चुकी है और सफलता अभी दूर की कौड़ी लग रही है l आठ इंची बोरिंग दो सौ फीट, ढाई सौ फीट पाईप खेत के चारों कोनों में दफ़न हैं l सबमर्सिबिल पम्प चलते ही थोड़ी देर पानी, थोड़ी देर बालू फिर गिट्टी फिर जाम l
आज से तीस - पैंतीस साल पहले यहाँ बोरिंग बस एक बार में ही हो गई थी l पच्चीस - तीस फीट से ज्यादा गहरा तो नहीं गए होंगे तब l बोगी चलाकर लोहे के पाईप धंसा दिए गए थे आसानी से l हमारे पास तब खड़ी बॉडी का हाई स्पीड जवाहर इंजन ( पम्पिंग सेट ) था उन दिनों l पंखा इंजन के साथ ही बंधा था, अलग से पट्टा नहीं लगाना पड़ता था l बैलगाड़ी पर इंजन लादकर पहुंचे, बोल्ट खोलकर तवा हटाया, पांच फीता सक्शन पाईप जोड़ा, मोबिल चेक किया , कपडे का छन्ना लगाकर डीज़ल डाला और बस l धड - धड - धड चालू l चार इंची पानी, बढ़िया साफ़, जाड़ों में गरमा गरम जैसे नीचे कोई बड़ा गीज़र लगा हो l हाँ जाड़ों में एक समस्या थी कि एक बार में हैंडल से इंजन स्टार्ट नहीं होता l पर दो - चार बार में हो ही जाता था l
अभी तो उतना साफ़ पानी देखने को तरस ही गए हैं l बिजली, बोरिंग, सबमर्सिबिल ने खूब अघवा दिया है l पर दिल है कि मानता नहीं l
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