दिनांक : २६ सितम्बर, २०१९
इमरान भाई
राम राम
राम राम
तुम तो अमरीका मा हौ एत्ते टैम, हमका पता है. कउनो फरक नहीं है कि तुम मुजफ्फराबाद मा फिचकुर निकारि रहे हौ कि न्यूयार्क मा मिमिया रहे हौ. आजु काल्हि चिट्ठी होरी सबका खोजिही लेती हैं.
वइसे हमार ककुआ हुएं हैं तुमका हुएं समझा देतीं मुलु वहु बुढउना उनका पिछुआय है. दूनो गुईंया बने घूमि रहे. दूनो जने मिलिकै तुमका गरिया रहे हैं. हमारि सलाह मानौ तौ तुम ककुआ केर पायं पकरि लेव, सबके समहे नहीं, कउने कोने मा. नहीं तो तुम जनतै हौ ककुआ का, तुम झेलि पइहौ ना. बुशरा बीवी जो दुई ठो जिन्न तुमरे साथ भेजिनि हैं उनते आलू छिलवइहैं कक्कू हुआँ.
इमरान भाई तुमका सरम नाम कै चीज छुई कै नहीं गय. आतंकिन का ट्रेनिंग तुम देव, उनके सरगना तुम पालौ लाखन बेक़सूर इंसानन क्यार खून तुमरे पाकिस्तान के माथे पर लिखा है, तुमही बताय रहे हौ. औ यहौ चाहति हौ कि दुनिया तुमका पुचकारै, भीख देय. अरे, अमरीका के कहे ते तुम काहे गूं खाय लीन्हेव? अब वहै तुम्हरे साथ चीनु कय रहा.
औ द्याखौ कश्मीर का रागु बंद कई देव, हमार कहा मानौ. चुप्पे ते अपनिऊ तरफ वाला लिखि देव हमका. नहीं तौ यहु चीन तुमका चबा जाई, तुमरे हाथे कुच्छु न आई.
कहावति है, ' बांटा पूतु परोसी बराबर ' लेकिन आहिउ तो हमारै खूनु. यही बदे समझाईति है. अमरीका-चीन के पायं न ध्वाव, भारत कय लुरखुरिया करौ पसीजि जाई. तुमका ज़िंदा राखब, मरै न द्याब. वरना ई दून्हो तुम्हार खूनु चूसि लेहैं.
बाकी, तुम्हारि मरजी.
अबे हम अपन कामु निपटा लेई, काल्हि फिरि लिखब.
राम राम
सुकुल, भौकापुर, लखनऊ
भारत
भारत
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