लखनऊ है ये
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जुगनू नहीं,
है आफ़ताब,
लखनऊ है ये
मुस्कुराईये ज़नाब,
लखनऊ है ये
है आफ़ताब,
लखनऊ है ये
मुस्कुराईये ज़नाब,
लखनऊ है ये
शीरी ज़बां है,
प्यार भरे
दिल मिलें यहाँ
इसका नहीं कोई जवाब,
लखनऊ है ये
प्यार भरे
दिल मिलें यहाँ
इसका नहीं कोई जवाब,
लखनऊ है ये
मुंह में रखिये
और घुल जाए
गिलौरी पान की
खाईये टुंडे कबाब,
लखनऊ है ये
और घुल जाए
गिलौरी पान की
खाईये टुंडे कबाब,
लखनऊ है ये
चौक की
गलियों में अब भी
शायरी की गूँज है
है अभी बाक़ी शबाब,
लखनऊ है ये
गलियों में अब भी
शायरी की गूँज है
है अभी बाक़ी शबाब,
लखनऊ है ये
मैटिनी हो
मेफ़ेयर में,
शाम हज़रत गंज में
वह मज़ा था बेहिसाब,
लखनऊ है ये
मेफ़ेयर में,
शाम हज़रत गंज में
वह मज़ा था बेहिसाब,
लखनऊ है ये
लखनऊ की
रगों में
अब भी धड़कता है शऊर
बेशऊरी है खराब,
लखनऊ है ये
रगों में
अब भी धड़कता है शऊर
बेशऊरी है खराब,
लखनऊ है ये
है अदब के
दायरे में
आसमां को छू रहा
मेरा शहर है लाज़वाब,
लखनऊ है ये
दायरे में
आसमां को छू रहा
मेरा शहर है लाज़वाब,
लखनऊ है ये
- डॉ प्रदीप कुमार शुक्ल
लखनऊ
लखनऊ
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