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ट्रेवर मलार्ड, दि डक
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प्रशांत महासागर में एक कुन्नी भर के द्वीप देश ' नियू ' में पता नहीं कहाँ से एक दिन एक प्यारी सी बत्तख ने कदम रखा. मलार्ड प्रजाति की इस तरह की बत्तखें न्यू ज़ीलैंड में पाई जाती हैं. घरेलू बत्तखों की पुरखा प्रजाति की यह बत्तख हमेशा समूह में ही रहती है. लेकिन एक दिन एक फायर मैन को यह बत्तख सड़क पर मटकती हुई मिली. लोगों से वह बेझिझक मिलती और किसी के भी लॉन में बेधड़क घुस जाती. नहीं मैं गलत बोल गया, यह बेझिझक मिलता और बेधड़क घुस जाता. दरअसल यह पुरुष बत्तख था.
लोगों ने अपने एक संसद सदस्य ट्रेवर के नाम पर प्यार से इसका नाम रखा ' ट्रेवर मलार्ड. ' ( काश हमारे नेता भी जनता का इतना ही प्यार और सम्मान सहेज पाते )
बिना नदियों, झीलों, झरनों के इस छोटे से देश में बत्तख के रहने के लिए लोगों ने सड़क के किनारे एक गड्ढे को पोखर बना दिया. उस पोखर में आग बुझाने वाली गाड़ी नियमित रूप से पानी भरने लगी.
पूरे देश में अकेला ट्रेवर बड़े शान से रहने लगा. साल भर में ही वह इतना मशहूर हो गया कि लोग अपने घरों का रास्ता भी ऐसे बताते, सीधे सड़क पर जाइए, थोड़ी दूर पर आपको ट्रेवर मिलेगा टहलता हुआ, बस वहाँ से बाईं तरफ दूसरी सड़क पर तीसरा मकान.
अब तक लोगों ने उसे विश्व का सबसे अकेला बत्तख कहना शुरू कर दिया पर वह अकेला था नहीं. समाज के कुछ सताए हुए पतियों ने उसके हाव भाव परखते हुए अंदाजा लगाया कि हो न हो यह पत्नी प्रताड़ित जीव है जो सौभाग्य वश अपनी पत्नी के चंगुल से छूट सका है. जाहिर है कि पतियों के लिए वह इर्ष्या का सबब था. जले पर नमक यह कि अपने पोखरे के पास ही उसने एक मुर्गी और वेका नाम की चिड़िया से अच्छी सी दोस्ती कर ली.
पर हाय रे किस्मत. ईश्वर से उसकी खुशी और प्रसिद्धि देखी न गई. अभी कल शाम को वह वेका से मिल कर अपने घर की तरफ मस्ती में गुनगुनाते हुए आ रहा था. तभी अचानक पास की झाड़ी में छिपे एक कुत्ते ( कुछ लोगों का मानना है कि यह कुत्ता ' पत्नी पीड़ित संघ ' के एक पदाधिकारी का पालतू कुत्ता था ) ने ट्रेवर पर पीछे से जोरदार हमला कर दिया. बेचारा ट्रेवर. उसने चीखने की कोशिश की पर उसकी आवाज उसके हलक से बाहर नहीं आ सकी. अगली सुबह झाड़ियों में ट्रेवर खामोश पड़ा हुआ मिला. उसकी आँखों में अपनी पत्नी और परिवार से बिछड़ने का दुःख साफ़ झलक रहा था.
काश ! अपने धरम पा जी कहीं से वहां पर प्रकट हो जाते और जोर से चीखते, " मैं तेरा खून पी जाऊंगा कुत्ते. " तो ट्रेवर आज ज़िंदा होता.
- प्रदीप कुमार शुक्ल
( सत्य - कथा )
नोट : ट्रेवर मलार्ड कल ( 28 जनवरी, 2019 ) नियू देश की सड़क किनारे एक झाड़ी में मृत पाया गया.

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