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हंस - हरि दर्शन
" कम लोगों को जानकारी है कि मेसी के पेनाल्टी को बचाने वाले आइसलैंड के गोलकीपर हेंस हेल्डर्सन भारत के किसी सिद्ध बाबा से कलाई पर बांधने वाला अभिमंत्रित रक्षा कवच लेकर गए थे।" .... भ्राता सरीखे अपने मित्र Shankhdhar Dubey जी के इस बयान का मैं खंडन करता हूँ l
अपने समर्थन में मैं महान भारतवर्ष की महान राष्ट्रवादी सरकार के एक महान मुख्यमंत्री का महालघु शोधपत्र यहाँ उद्घृत करना चाहता हूँ -
दरअसल ' हेंस हेल्डर्सन ' का वास्तविक नाम " हंस - हरि दर्शन " है l अपने इस जीवनकाल में उन्होंने कभी जम्बूद्वीप पर पाँव नहीं धरा l शोध से पता चला है कि एक सौ सात जन्मों पूर्व आर्यावर्त में एक तपस्वी रहा करते थे, मुनि हलदर्शन l उनका एक हंस नाम का शिष्य हुआ करता था l एक बार की बात है कि मुनि ने कहा " प्रिय हंस, मैं कुटिया में थोड़ा आराम करना चाहता हूँ, द्वार से किसी को प्रवेश न करने देना l " ऐसा कह कर मुनि निद्रा की शरण में चले गए l इधर शिष्य ने दरवाजे से पवन तक का प्रवेश वर्जित कर दिया l कुछ समय पश्चात मुनि की आत्मा ने पवन के अभाव में शरीर का त्याग कर दिया और दरवाजे से बिलबिला कर बाहर निकलते हुए हंश को शाप दिया कि जा, तू जन्म - जन्मान्तर इसी तरह प्रवेशद्वार पर खड़ा रह कर, हर किसी वस्तु का प्रवेश निषेध करता रहे, चाहे वह मेस्सी जैसे अलौकिक योद्धा द्वारा फेंका गया आग का गोला ही क्यों न हो l ये वही " हंस - हरि दर्शन " हैं l
- प्रदीप शुक्ल

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