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सिरिमान मैक पोम्पियो जी
नमस्कार
पोम्पियो जी तुम अमरीका ते चलि कै एत्ती दूरि आये हौ तहि बदे तुमका हम कुछु उलटा सीधा ना कहब. वइसेव मेहमान हमरे हियाँ भगवान् होति हैं. मुलु तुमतो हुआँ अपनी धरती पर कदम रखतै पैंट उतरवा लेति हौ. हमरे साहरुखौ का ना छोड़ेव तुम.
खैर गुस्सा हम वहि बदे नहीं हन. गुस्सा हमार यहि खातिर है कि हमरे ककुआ के तुम, मतलब तुम्हार देसु, अमरीका बहुत दोस्त बनतु रहै औ उनहिन की पीठ मा छूरा भोंकि दिहेव. ठीक चुनावन के बीच उनकी तसबीर के साथ टाइम मा डिवाइडर इन चीफ बतायेव. औ इतनै नहीं वही टैम तुम अपने हियाँ ते व्योपार मा अड़ंगा लगाय दीन्हेव. अरे तनिकु चुनाव - फुनाव निपटि जातीं तौ सब कई लेतिव, हियाँ काका कउन मना करतीं.
वहू का छोड़व, अब तुम हमरे ऊपर चढ़ेहे चले आ रहेव. बेमतलब मा अईठि रहेव. अच्छा खासा ईरान ते सस्ता मद्दा तेलु आवति रहै वहिका बंद करा दीन्हेव. ई अरबन रुपैया को हगी? चीन ते 5 जी न लेव नहीं तौ तुम्हार कान काटि ल्याब, रूस ते S - 400 न लेव नहीं तौ तुम्हारि पूँछ उमेठि द्याब, हमका पाकिस्तान समझे हौ का?
ककुआ हमार फकीर आदमी हैं. डेराति बिलकुल नहीं. काल्हि मिलिहैं तुमरे आका ते. बात न बनी तौ पुतिन कक्कू हुऐं हैं. शी जिन पिंग चच्चा खातिर झूला हियाँ ठीक कराई रहे हैं.
खैर तुम आजु वापस जाय रहेव तौ राजी खुसी जाव. अब अउर गारी नहीं. हियाँ क्यार आम जरूर खाय का जायेव. भारत के आम रसील हैं चूसि कै खायेव. मुला जादा जोर ते दबैहौ तो तुम्हारि पैंट खराब होई जाई, हम बताय देइति है.
अच्छा, फिरि लिखिबे.
राम - राम
सुकुल
भौकापुर, नखलऊ, भारत 27.06.2019

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