प्रज्ञान बेटा
ख़ुश रहो, जुग-जुग जियो
ख़ुश रहो, जुग-जुग जियो
यहाँ के हाल चाल तो वैसई हैं जैसे तुम छोड़ गए थे. लोग नदियों में डूब रहे हैं. सेल्फियाते हुए ट्रेन के नीचे घुस रहे हैं. पटाखों के साथ भुन रहे हैं. कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरा देश काकामय है, कश्मीर कुछ ज्यादा ही. एनडीटीवी और कुछ अंग्रेजी चैनलों को छोड़कर सब जगह देश खुशहाल है, पकिस्तान को रगड़ रहा है. मल्लब जब तक पाकिस्तान रगड़ा जाता रहेगा, भारत ख़ुशहाल बना रहेगा. खाली एक आध चैनलों पर देश की अर्थव्यवस्था में कुछ गिरावट है, बकिया जगह बस फर्राटा भरने के पहले देश थोड़ी सांस ले रहा है.
नई बातें कुछ ख़ास नहीं हैं. पीसी चच्चू तिहाड़ में आराम फरमा रहे हैं. उनको बस दो चीजों की चिंता है. सुबह में वह उंकडू नहीं बैठना चाहते और देश की अर्थव्यवस्था को भी इस तरह कांखते हुए नहीं देखना चाहते. घर के बने हुए गोभी के पराठों के लिए उन्होंने अंग्रेजी में कुछ कहा जिसे हरियाणवी गार्ड समझ नहीं पाया.
काका ने दरियादिली दिखाते हुए एक अरब डॉलर का कर्ज रूस को दिया है. ' घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने ' वाली कहावत राष्ट्रविरोधी लोग कह रहे हैं. उनसे अब काका को कोई फरक नहीं पड़ता. काका अब विश्व के नेता हैं. रूस के लोगों को विकास की चटनी चटाना उनकी प्राथमिकता में है. ध्येय वही है, पाकिस्तान को रगड़ना.
खैर, ई तो सब यहाँ की बातें हो गईं. तुम बताओ कैसा रहा सफ़र? हमाये नखलऊ से सेठ जी की तेजस अब दिल्ली तक जायेगी-आयेगी. अगली बार तुम भी सेठ वाले विकरम पर ही जाना. जल्दी पहुँच जाओगे और आराम से टीवी देखते हुए सफ़र कट जाएगा.
सुना है दक्खिन में उतरोगे. ठीक है भैया पर बाएं तरफ आँख उठा कर भी मत देखना, वरना क्या पता शाह चच्चू तुमको अगली बार भेजबे न करें. चरम दक्षिण में रहना, देश भी वही कर रहा है.
पता चला है कि बचुआ तुम किसी गड्ढे के पास उतर रहे हो. बेटा संभल कर पैर बढ़ाना. हेलमेट लगा लेना और बड़ी गाड़ी देख कर किनारे खड़े हो जाना. पल्यूशन वाला कागज दिखा देना नहीं तो गडकरी दउआ पांच हजार तुम्हारे खाते में चढ़ा देंगे.
अच्छा तुम रात को वहाँ पहुंचोगे, तब तक हम सो जायेंगे. तुम्हारे दादा जी बहुत खर्राटे लेते हैं इसलिए हम पहले ही नींद की गोली ले कर सो जाते हैं.
औ बच्चा ठीक से रहना. कोई शिकायत न मिले तुम्हारी. आज तुम उतर कर आराम करो. कल फिर तुमको चिट्ठी लिखेंगे. औ सुनो, किसी के बहकावे में मत आना. अपना काम करना बस. कोई अनजान आदमी कुछ खाने वाने को दे तो खा मत लेना.
बाकी तुम तो खुद समझदार हो.
थोड़ा लिखा, ज्यादा समझना.
तुम्हारी दादी
वसुंधरा
लखनऊ, भारत
लखनऊ, भारत
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