लीजिये, फिर आ गया हिंदी दिवस
तिलक माथे पर लगाए
नए हैं परिधान
लीजिये,
फिर आ गया हिंदी दिवस
नए हैं परिधान
लीजिये,
फिर आ गया हिंदी दिवस
आज दिन भर व्यस्त है
चर्चा, सभाओं में
कल कहीं खो जाएगा
बासी हवाओं में
चर्चा, सभाओं में
कल कहीं खो जाएगा
बासी हवाओं में
फूल कर कुप्पा हुआ,
लो पा गया सम्मान
लीजिये,
फिर आ गया हिंदी दिवस
लो पा गया सम्मान
लीजिये,
फिर आ गया हिंदी दिवस
ड्यूड ने हिंडी लिखा
तो हो गया है कूल
साल भर की सब हिकारत
वह गया है भूल
तो हो गया है कूल
साल भर की सब हिकारत
वह गया है भूल
घोल कर बस पी गया है
आज सब अपमान
लीजिये,
फिर आ गया हिंदी दिवस
आज सब अपमान
लीजिये,
फिर आ गया हिंदी दिवस
सुबह भागा बैंक की
दीवार पर चिपका
दोपहर प्रोफ़ेसरों के
पैर में लपका
दीवार पर चिपका
दोपहर प्रोफ़ेसरों के
पैर में लपका
फ़ेसबुक की वाल पर
अब हो रहा अवसान
अब हो रहा अवसान
लीजिये,
फिर आ गया हिंदी दिवस
फिर आ गया हिंदी दिवस
- प्रदीप कुमार शुक्ल
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