जब से इंसान ने इस गोले पर होश सँभाला है, चिकित्सक किसी न किसी रूप में मौजूद रहा ही है, आगे भी रहेगा. चिकित्सक के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती. अब समाज की सोच ही तय करेगी कि हमारी आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य किन हाथों में होगा.
लंबा जीवन जीने की लालसा बढ़ी है तो उसी अनुपात में रोगों की जटिलताएं भी बढ़ी हैं. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को आत्मसात करने के लिए राह कठिन से कठिनतर और लम्बी होती जा रही है. चिकित्सक भी हमारी आपकी तरह इंसान है. उसे भी सम्मानपूर्वक और सुख सुविधाओं से युक्त जीवन जीने का अधिकार है.
ऐसे में समाज / मीडिया यदि चिकित्सकों के प्रति इसी तरह दुराग्रही बना रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हम समाज के श्रेष्ट मस्तिष्कों को चिकित्सा विज्ञान से विमुख कर देंगे या उन्हें दूसरे देशों में जाने के लिए मजबूर कर देंगे.
हाँ, सरकार चाहे तो आगे होने वाली योग्य चिकित्सकों की संभावित कमी को पूरा करने के लिए अंजना ओम कश्यप जैसी श्रेष्ठ, बुद्धिमान, संवेदनशील, जुझारू, मुखर, कर्मठ और देशभक्त ललनाओं ( और लालों ) को ब्रिज कोर्स करवा सकती है.
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