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राजा तो वैसा ही होगा जैसी प्रजा होगी. यह लोकतंत्र है. जो बात प्रजा को अच्छी लगती है वही राजा कहेगा, करेगा. मरकहे काटजू साहब बता ही चुके हैं. इसलिए ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. दस प्रतिशत के मन का तो कभी नहीं होगा. वह तो बस चिल्लायेंगे, वोट देने भी नहीं जायेंगे. बाक़ी, नब्बे प्रतिशत लोगों की सोच में जब बदलाव आयेगा तो राजा भी बदल जाएगा.
यह मेल किसी मेल ने 1988 में भेजी थी, अभी डस्टबिन में मुझे मिली. हमने सोचा दस प्रतिशत के सामने रखूँ, शायद नब्बे प्रतिशत को कुछ समझा पायें ये लोग.

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