देश चुनाव में है
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चली गोलियां, पत्थर, डंडे
सड़कों पर घूमे मुस्टंडे
तब जा कर चुनाव निपटे हैं
सड़कों पर घूमे मुस्टंडे
तब जा कर चुनाव निपटे हैं
नेता जी के
मुख से निकली
भाषाओं के कान गरम हैं
लक्ष्मी जी के पैर दबाती
सरस्वती की आँखें नम हैं
मुख से निकली
भाषाओं के कान गरम हैं
लक्ष्मी जी के पैर दबाती
सरस्वती की आँखें नम हैं
मर्यादा का चीर हरण है
संस्कार सब लुटे पिटे हैं
संस्कार सब लुटे पिटे हैं
हो जाता
रडार से बाहर
कोई इतना फेंक रहा है
कोई बस पूरे चुनाव में
वही एक धुन रेंक रहा है
रडार से बाहर
कोई इतना फेंक रहा है
कोई बस पूरे चुनाव में
वही एक धुन रेंक रहा है
कहीं धर्म की आग सुलगती
कहीं अस्मिता की लपटें हैं
कहीं अस्मिता की लपटें हैं
दो कौड़ी
कुर्सी की ख़ातिर
लोग थूक कर चाट रहे हैं
फ़ौज उल्लुओं की सड़कों पर
गधे पँजीरी बांट रहे हैं
कुर्सी की ख़ातिर
लोग थूक कर चाट रहे हैं
फ़ौज उल्लुओं की सड़कों पर
गधे पँजीरी बांट रहे हैं
गंगा मैया छोड़ - छाड़ कर
लोग मुतहरा में रपटे हैं
लोग मुतहरा में रपटे हैं
- प्रदीप कुमार शुक्ल
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