इंतज़ार में सूखे नैन
रातों दिन का छीना चैन
नहीं सुहाए कोई बात
क्या सखि साजन? ना ' बरसात '
रातों दिन का छीना चैन
नहीं सुहाए कोई बात
क्या सखि साजन? ना ' बरसात '
सहमा - सहमा रहा लुकाय
मुखिया होर बहुत पछुआय
गारी दय - दय केहे अकच्छ
बहिन मंसवा?
नाहिं, ' बिपच्छ '
मुखिया होर बहुत पछुआय
गारी दय - दय केहे अकच्छ
बहिन मंसवा?
नाहिं, ' बिपच्छ '
- प्रदीप कुमार शुक्ल
उनका इंतजार, उई आवैं
ओंठ छुएं, गरदन सोहरावैं
काहे अब हमार जिउ जारैं
सखी सजनवा?
ना, ' बौछारैं '
ओंठ छुएं, गरदन सोहरावैं
काहे अब हमार जिउ जारैं
सखी सजनवा?
ना, ' बौछारैं '
- प्रदीप कुमार शुक्ल
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