अकेले बुदबुदाना चाहता हूँ
मैं खुद को गुनगुनाना चाहता हूँ
मैं खुद को गुनगुनाना चाहता हूँ
अभी संदूक से लाया हूँ अल्बम
ज़रा सा मुस्कुराना चाहता हूँ
ज़रा सा मुस्कुराना चाहता हूँ
पुराने जख्म अब भरने लगे हैं
नई फिर चोट खाना चाहता हूँ
नई फिर चोट खाना चाहता हूँ
मुझे मालूम है अपनी लियाक़त
मगर मैं आज़माना चाहता हूँ
मगर मैं आज़माना चाहता हूँ
समय हो, दोस्त हों, हो चाय का कप
वही गुजरा ज़माना चाहता हूँ
वही गुजरा ज़माना चाहता हूँ
कहीं मिल जाए जो बचपन का साथी
ज़रा सा गुदगुदाना चाहता हूँ
ज़रा सा गुदगुदाना चाहता हूँ
तुम्हे पाकर छलक आये हैं आंसू
तुम्ही से पर छुपाना चाहता हूँ
तुम्ही से पर छुपाना चाहता हूँ
- प्रदीप कुमार शुक्ल
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