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पहिली बारिस की बौछारैं
पहिली बारिस की बौछारैं
अस धरती ते रहीं बतलाय
जइसे बिछुरी रहैं सहेली 
मिली तो गरे लिहिन लपिटाय
सोंधी महक उठी धरती ते
सगरे फूल गए सरमाय
मस्त मुरैला ठुम ठुम नाचै
पखना सबै दिहिस फैलाय
सूखी दूब के सूखे ह्वांठन
पानी मिला आइ मुसकान
बूँदी लटकि रहीं हैं अइसे
जइसे झुमकी लटकैं कान
कुछु बूँदै लीन्हे पुरवइया
उनका झुलुआ रही झुलाय
जादू है वहिके हान्थन मा
द्याखति द्याखति गईं बिलाय
कुछु बूँदै धरती का चूमैं कुछु
पातन ते रहीं बेल्हराय
कुछु तो लटकि रहीं फूलन ते
अउर चुटकुला रहीं सुनाय
खुसुर फुसुर धरती ते कीन्हिनि
आपन दुखड़ा रहीं बताय
आँसन के फिरि बहे पनारा
धरती रोय परी बुम्बुआय
- प्रदीप शुक्ल
28 जून, 2018

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