गाँव देखता टुकुर टुकुर
बदला बदला सा मौसम है
बदले से लगते हैं सुर
दीदा फाड़े शहर देखता
गाँव देखता टुकुर - टुकुर
बदले से लगते हैं सुर
दीदा फाड़े शहर देखता
गाँव देखता टुकुर - टुकुर
तिल रखने की
जगह नहीं है
शहर ठसाठस भरे हुए
उधर गाँव में पीपल के हैं
सारे पत्ते झरे हुए
जगह नहीं है
शहर ठसाठस भरे हुए
उधर गाँव में पीपल के हैं
सारे पत्ते झरे हुए
मेट्रो के खम्भे के नीचे
रात गुजारे परमेसुर
रात गुजारे परमेसुर
यहाँ शहर में
सारा आलम
आँख खुली बस दौड़ रहा
वहाँ गांव में रामदीन
बस दिन उपास के जोड़ रहा
सारा आलम
आँख खुली बस दौड़ रहा
वहाँ गांव में रामदीन
बस दिन उपास के जोड़ रहा
मनरेगा में काम मिलेगा?
दिल करता है धुकुर - पुकुर
दिल करता है धुकुर - पुकुर
सुरसतिया के
दोनों लड़के
सूरत गए कमाने
गेहूँ के खेतों में लेकिन
गिल्ली लगीं घमाने
दोनों लड़के
सूरत गए कमाने
गेहूँ के खेतों में लेकिन
गिल्ली लगीं घमाने
लंगड़ा कर चलती है गैया
सड़कों ने खा डाले खुर
सड़कों ने खा डाले खुर
दीदा फाड़े शहर देखता
गाँव देखता टुकुर - टुकुर
गाँव देखता टुकुर - टुकुर
- प्रदीप शुक्ल
25.03.2015
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